अपने दुग्ध उत्पादों में शुद्धता का राग अलापने वाली पराग के मिलावट की कलई कोलकाता की प्रयोगशाला ने खोल दी है। पराग के दूध नमूने में जांच के दौरान वॉशिंग पाउडर और रिफाइंड मिले होने की पुष्टि हुई है।
मिलावट को साबित करने वाली इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग ने पराग के बहराइच और लखनऊ के सहायक महाप्रबंधक और दूध पैकेटों की सप्लाई करने वाले वाहन मालिक को नोटिस जारी किया है।
जनवरी 2013 में खाद्य सुरक्षा विभाग ने जांच अभियान चलाया था। पराग के दुग्ध पैकेटों का नमूना गोरखपुर प्रयोगशाला भेजा गया था। मार्च में गोरखपुर प्रयोगशाला की रिपोर्ट आई तो दूध में मामूली कमियां उजागर हुईं।
इस पर बहराइच के तत्कालीन खाद्य सुरक्षा अधिकारी जेपी सिंह ने नमूना निर्दिष्ट खाद्य प्रयोगशाला कोलकाता भेज दिया। एक अगस्त को कोलकाता प्रयोगशाला से आई जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाले नतीजे सामने आए हैं।
पराग डेयरी के दुग्ध नमूने में वॉशिंग पाउडर और रिफाइंड के मिश्रण की पुष्टि हुई है। साथ ही पराग दुग्ध के जिस पैकेट की जांच हुई है, उस पर बैच नंबर और पैकिंग की तिथि भी अंकित नहीं थी, जिसके चलते जांच रिपोर्ट में उत्पाद को अनसेफ और मिस ब्रांडेड बताया गया है।
जांच रिपोर्ट आने के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग ने पराग डेयरी के बहराइच और लखनऊ के सहायक महाप्रबंधक को नोटिस भेजा है। दूध के पैकेटों की सप्लाई करने वाले वाहन मालिक से भी जवाब मांगा गया है।
जांच रिपोर्ट में ये भी मिली खामी
कोलकाता से आई जांच रिपोर्ट में मिल्क फैट 6 फीसदी की जगह महज 4.22 प्रतिशत मिला है। मिल्क सॉलिड नॉट फैट भी नौ प्रतिशत के सापेक्ष सिर्फ 8.62 ही है। बीआर रीडिंग भी 40-43 के मध्य होनी चाहिए जबकि जांच रिपोर्ट में 30.9 ही पाई गई है।
सात लाख जुर्माना व उम्रकैद का प्रावधान
खाद्य सुरक्षा विभाग की निर्देशिका के मुताबिक मामूली मिलावट पर सात साल की सजा और सात लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान है। जबकि वॉशिंग पाउडर और रिफाइंड जैसी मिलावट पर दोषी को उम्रकैद की सजा हो सकती है।
पराग उत्पाद में वॉशिंग पाउडर और रिफाइंड की मिलावट दंडनीय अपराध की श्रेणी में है। इस मामले में खाद्य सुरक्षा आयुक्त ही कार्रवाई कर सकते हैं। मामले की फाइल खाद्य सुरक्षा आयुक्त, लखनऊ को भेज दी गई है।
- संदीप चौरसिया, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी, बहराइच