बचपन में बाल खाने की आदत एक युवती को महंगी पड़ गई। लगातार बुखार और पेट दर्द रहने पर जांच कराई तो पता चला कि पेट में बालों का गुच्छा फंसा है।
मंगलवार को निजी अस्पताल में डॉक्टरों की पांच सदस्यीय टीम ने ऑपरेशन पेट से ढाई किलो बालों का गुच्छा निकाला। चिकित्सकों का मानना है कि बाल खाने की प्रवृत्ति एक तरह की बीमारी है। जो डिप्रेशन के चलते पनपती है।
गांव शाहपुर गुलाल, बिजनौर निवासी प्रीति (19) पुत्री रघुवीर सिंह को बचपन में बाल खाने की आदत थी। परिजन उसे रोकते थे, लेकिन वह चोरी-छिपे बाल खा लिया करती थी।
एक घंटे तक चला ऑपरेशन
रघुवीर सिंह ने बताया है कि तीन साल पहले उसने पेट में दर्द की शिकायत बताई तो स्थानीय डॉक्टरों को दिखाया गया। कुछ समय ठीक रहने के बाद फिर से उसे शिकायत बनी रही।
दो माह पूर्व प्रीति की हालत ज्यादा बिगड़ी तो सीटी स्कैन में पेट में गांठ के आकार की कुछ चीज सामने आई। प्रीति का मंगलवार दोपहर गंगानगर स्थित देव अनंत हॉस्पिटल में डॉ. राहुल शर्मा, डॉ. सुमित शर्मा, डॉ. अवीत राणा, डॉ. सचिन व डॉ. अजय की टीम ने ऑपरेशन किया।
करीब एक घंटे चले ऑपरेशन के बाद पेट से बालों का गुच्छा निकाला जा सका। ऑपरेशन के बाद युवती को आईसीयू वार्ड में रखा गया।
कोट
प्रीति बचपन में बाल खाती थी, जिसके चलते उसके पेट में बाल जमा होना शुरू हो गए। करीब एक घंटा चले ऑपरेशन में पेट से बालों का गुच्छा निकाला गया।- डॉ. मेजर राहुल शर्मा, सर्जन
पारिवारिक कारणों से कुछ बच्चे डिप्रेशन में चले जाते हैं। मन लगाने के लिए वे कुछ ऐसी चीजें ढूंढ लेते हैं जो खाने योग्य नहीं होती।- डॉ. रवि राणा, वरिष्ठ मनोचिकित्सक, मेडिकल कॉलेज