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भारत के कुंवारे नेता जिन्होंने बदल डाली राजनीति

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विश्व के इतिहास में ऐसा बहुत कम हुआ है कि किसी बड़े लोकतंत्र में दो कुंवारे नेताओं के बीच देश की लीडरशिप के लिए जंग हो। 2014 लोकसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने नरेंद्र मोदी को पीएम का उम्मीदवार घोषित किया गया है और कांग्रेस में राहुल गांधी को पीएम बनाने की बात चलती रही है। फिलहाल, नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी दोनों ही कुंवारे हैं इसलिए 2014 के चुनाव को 'दो कुंवारों के बीच युद्ध' की संज्ञा दी जा रही है। अगर अमेरिका की आप बात करें तो वहां राष्ट्रपति शादीशुदा है या नहीं, वहां के वोटर्स के लिए यह बात बहुत मायने रखती है। अमेरिकी नागरिकों को अपने देश के सर्वोच्च पद के लिए एक ठोस पारिवारिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवार की दरकार होती है। लोग चुनाव प्रचार अभियान के दौरान राष्ट्रपति चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार की बीवियों को मुस्कुराते और हाथ हिलाते सपोर्टिव रोल में देखना पसंद करते हैं।
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लेकिन भारत में ऐसा नहीं है। स्वतंत्रता के बाद भारत में नेताओं में वंशवाद और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने की प्रवृत्ति देखी गई। इससे तंग आकर भारतीय जनता उन लोगों को सत्ता की डोर थमाती रही हैं, जिनका कोई परिवार नहीं। लोगों ने ऐसे कुंवारे नेताओं पर यकीं किया जिन्होंने सत्ता के शीर्ष पर रहते हुए लंबी पारी खेली और कुछ राज्यों में अभी भी उनका राज है। हम ऐसे ही दस टॉप भारतीय नेताओं की सूची लेकर आए हैं जो कुंवारे हैं। आगे स्लाइड्स पर क्लिक करके जानें कौन-कौन हैं वो नेता...

अटल बिहारी वाजपेयी

अटल बिहारी वाजपेयी भारत के बहुत ही लोकप्रिय और प्रभावशाली नेता रहे हैं। उन्होंने शादी नहीं की। वह अपने कुंवारेपन की दुहाई सार्वजनिक मंचों से देते रहे। वे यह कहते रहे कि चूंकि उनका कोई परिवार नहीं है इसलिए उनके सत्ता में आने से किसी तरह के वंशवाद या परिवारवाद को बढ़ावा नहीं मिल सकता और न ही परिवार के लोगों का कोई हस्तक्षेप ही हो सकता है। वह संसद के लिए नौ बार चुने गए और पहले ऐसे गैरकांग्रेसी प्रधानमंत्री थे जिन्होंने पूरे पांच साल का कार्यकाल पूरा किया। वह तीन बार देश के प्रधानमंत्री बने। वह 1996 में पहली बार पीएम बने लेकिन सरकार सिर्फ 13 दिन चली। इसके बाद वह 1998 में पीएम बने तो उनकी सरकार 13 महीने चली। वह 1999 में तीसरी बार पीएम बने तो 2004 तक बने रहे।

नरेंद्र मोदी

अटल बिहारी वाजपेयी के बीमार पड़ने के बाद लालकृष्ण आडवाणी ही बीजेपी के सबसे कद्दावर नेता है। लेकिन पार्टी ने उन्हें दरकिनार करते हुए अपने सबसे लोकप्रिय नेता नरेंद्र मोदी को पार्टी की तरफ से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया है। नरेंद्र मोदी बीजेपी के बहुत सफल मुख्यमंत्री रहे हैं। वह गुजरात में तीन बार लगातार बीजेपी को चुनाव में जीत दिला चुके हैं। वह कांग्रेस की वंशवादी राजनीति का मजाक उड़ाने का कोई मौका नहीं छोड़ते और वाजपेयी की तरह अपने वोटर्स को बताते रहते हैं कि उनके पास कोई परिवार नहीं है इसलिए उनकी सरकार में वंशवाद के लिए कोई जगह नहीं। कई बातों को लेकर नरेंद्र मोदी की आलोचना होती है लेकिन कई लोगों का ऐसा भी मानना है कि उन्होंने अपनी मेहनत से गुजरात को दुनिया के नक्शे पर पॉपुलर इन्वेस्टमेंट डेस्टीनेशन (पूंजी निवेश के लिए लाभदायक जगह) में बदल दिया है। पहले से उनको भारत के पीएम पद का प्रबल दावेदार माना जाता रहा है और आखिरकार बीजेपी ने उनको पीएम पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया है।

मायावती

मायावती बहुजन समाज पार्टी की बहुत प्रभावशाली नेता हैं। वह भारतीय राजनीति की 'दलित क्वीन' कही जाती हैं। अपने मेंटर कांशीराम के साथ मिलकर काम करते हुए उन्होंने अपनी रणनीतियों से बीएसपी को यूपी में सत्ता में ला दिया और अभी भी उसे सत्ता में लाने के लिए संघर्ष कर रही हैं। वह देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश की पहली दलित मुख्यमंत्री बनीं और चार बार मुख्यमंत्री रह चुकी हैं। उन्होंने शादी नहीं की। पार्टी में उनकी ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पार्टी का हर-छोटा बड़ा निर्णय जो भी वो लेती हैं वही आखिरी और सर्वमान्य होता है। पार्टी कैडर के बीच उन्होंने अपनी खासी पकड़ बनाई है। यहां तक कि दलित नेता होने के बावजूद सवर्णों के बीच पैठ बनाने में भी वो कामयाब रही हैं।

ममता बनर्जी

अगर किसी महिला ने वर्तमान भारतीय राजनीति में अपना खास मुकाम बनाया है तो उसमें एक ममता बनर्जी का नाम है। वह पश्चिम बंगाल की सीएम हैं। पश्चिम बंगाल के वामपंथी शासन को उखाड़ने के लिए वह हमेशा प्रयासरत रहीं और लगातार हार मिलने के बावजूद वह आखिरकार सफल रहीं। वह अविवाहित हैं। वह सार्वजनिक मंचों से यह कहती रही हैं उन्होंने अपना जीवन पश्चिम बंगाल के लोगों के लिए समर्पित किया है और अपने बारे में सोचने का उनके पास समय नहीं है। कई बार अपने फैसलों को लेकर उनकी आलोचना भी हुई। जिस तरह से वो पार्टी के निर्णय लेती हैं उन पर तानाशाह की तरह काम करने आरोप भी लगते रहे हैं। लंबे संघर्ष के बाद जिस तरह उन्होंने बंगाल से वामपंथी सरकार को उखाड़ फेंका, उनकी छवि एक मजबूत इरादों और कभी हार न मानने वाली महिला की बनी।

जयललिता

  अभिनेत्री से नेता बनीं जे जयललिता चार बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनी हैं। उन्होंने राजनीति में हमेशा अपने अविवाहित होने को प्रचारित किया और डीएमके के शासन को करुणानिधि के परिवार का शासन बताती रहीं। जे जयललिता किसी राजनीतिक परिवार में पैदा नहीं हुईं और उन्होंने एआईएडीएमके पार्टी की सेवा करते हुए राजनीति में अपना मुकाम हासिल किया। वह कठोर निर्णय लेने के लिए जानी जाती हैं। जयललिता मौके की राजनीति करने के लिए जाती हैं। पार्टी हितों को देखते हुए कभी वो एनडीए का हिस्सा रहीं तो राजनीतिक समीकरण बिगड़ते ही उससे अलग भी हो गईं। इन दिनों वो एक और कुंवारे नेता और बीजेपी से पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के करीब आतीं नजर आ रही हैं। नरेंद्र मोदी को जब चुनाव प्रचार की कमान सौंपी गई थी तो जयललिता ने इसका स्वागत भी किया था। जयललिता ने जब सीएम के तौर पर शपथ ली तो नरेंद्र मोदी ने भी शपथ ग्रहण समारोह में शिरकत की थी।

नवीन पटनायक

नवीन पटनायक बीजू जनता दल के अध्यक्ष हैं और वर्ष 2000 से ओडिशा की मुख्यमंत्री हैं। वह ओडिशा के दिवंगत प्रसिद्ध नेता और पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक के बेटे हैं। नवीन खुद को अविवाहित बताते हुए अपने वोटर्स से कहते रहे हैं कि कांग्रेसियों की तरह उनका कोई परिवार नहीं है इसलिए उनकी सत्ता के दौरान किसी परिवारवाद पर आधारित शासन का खतरा नहीं है। जब तक नवीन पटनायक के पिता बीजू पटनायक राजनीति में सक्रिय रहे नवीन राजनीति से दूर ही रहे। बीजू पटनायक के निधन के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं के दबाव में बीजू पटनायक राजनीति में आए और छा गए। एक मझे हुए राजनीतिज्ञ के तौर पर नवीन पटनायक एक कुशल प्रशासक साबित हुए और सत्ता में रहते हुए भी चुनाव जीतने में कामयाब हुए।

एपीजे अब्दुल कलाम

एपीजे अब्दुल कलाम हालांकि राजनीति में नहीं रहे लेकिन राजनीतिक दलों ने उनको 2002 में भारत का राष्ट्रपति बनाया। वह अविवाहित हैं। डॉक्टर कलाम को देश का सर्वोच्च पुरस्कार भारत रत्न मिला है। वह देश में बैलिस्टिक मिसाइलों के निर्माण में अहम योगदान देने के लिए जाने जाते हैं। कलाम ने 1998 में पोखरण परमाणु परीक्षण में अहम संगठनात्मक, तकनीकी और राजनीतिक भूमिका निभाई थी। कलाम ने अपनी किताब 'इंडिया 2020' में भारत को 2020 तक विकसित करने की योजनाओं को रेखांकित किया। उन्होंने 'विंग्स ऑफ फायर', 'इग्नाइटेड माइंड्स' सहित कई बेस्टसेलर किताबें लिखी हैं। राष्ट्रपति के तौर पर भी डॉ. कलाम का कार्यकाल काफी यादगार रहा। वो आम जनता के बीच काफी लोकप्रिय राष्ट्रपति साबित हुए।

उमा भारती

साध्वी उमा भारती बीजेपी की फायर ब्रांड नेता हैं। अयोध्या राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान वह लाइमलाइट में आईं। उन्होंने मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री के तौर पर काम कि या और वह केंद्र में कैबिनेट मिनिस्टर भी रही हैं। वह भारतीय जनता पार्टी में वरिष्ठ नेताओं की आलोचना करने के लिए पार्टी से निकाली गई थीं। उन्होंने अपनी पार्टी बनाई लेकिन असफल रहने के बाद फिर से 2011 में बीजेपी में लौट आईं। उमा भारती ओजस्वी वक्ता हैं और अपने बेबाक बयानों के लिए भी जानी जाती हैं। उमा भारती साध्वी हैं लेकिन बीजेपी के पूर्व महासचिव केएन गोंविदाचार्य उनके प्रति अपने आकर्षण को सार्वजनिक तौर पर स्वीकार कर चुके हैं। हालांकि उमा भारती के इनकार के बाद उन्होंने साध्वी को अपना राजनीतिक गुरु मान लिया था।

के एन गोविंदाचार्य

अविवाहित के एन गोविंदाचार्य बीजेपी के टॉप नेताओं में से एक रहे हैं। उनको चिंतक और अपनी पार्टी तथा कांग्रेस के खुले आलोचक के तौर पर ख्याति मिली। हाल में उन्होंने 'लोकतंत्र बचाओ मोर्चा' का गठन किया है। वह बीजेपी के अभियानों के आर्किटेक्ट रहे जिससे बीजेपी भारतीय राजनीति में मजबूत हुई। वह जेपी मूवमेंट के दौरान भी काफी सक्रिय रहे। गोविंदाचार्य के उमा भारती से असफल प्रेम संबंध रहे हैं। बीजेपी के महासचिव रहने के दौरान संगठन के स्तर पर उन्होंने बेहतरीन काम किया लेकिन मुखर आलोचक होने के कारण वो राजनीति में अनफिट साबित हुए और धीरे-धीरे पार्टी से दरकिनार कर दिए गए।
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राहुल गांधी

कई सालों तक गैर कांग्रेसी शासन के बाद 2004 में जब कांग्रेस को बहुमत मिला तो हलांकि मनमोहन सिंह को पीएम बनाया गया लेकिन इस बीच फिर से गांधी परिवार (सोनिया गांधी और राहुल गांधी) राजनीति में सक्रिय हो गया। जवाहर लाल नेहरू के परपोते और राजीव गांधी के बेटे राहुल गांधी को कांग्रेस का उपाध्यक्ष बनाया गया। अब वह मां सोनिया गांधी के साथ पार्टी की हर गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी देते हैं और कांग्रेस में उनको पीएम पद का स्वभाविक उम्मीदवार के तौर पर देखा जाता है। हलांकि अभी तक इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
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