भले ही सहमति से सेक्स की उम्र 18 से घटा कर 16 साल करने का सभी दलों के सांसदों ने विरोध किया हो, मगर संसद की एक समिति मानती है कि 15 साल से भी कम उम्र के किशोर यौन संबंध बनाने लगे हैं।
इतना ही नहीं वे यौन संबंधों के कारण एचआईवी के संक्रमण का शिकार भी हो सकते हैं।
संसद की स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संबंधी स्थाई समिति ने 15 वर्ष से कम आयु में किशोरों में बढ़ रही यौन संबंध बनाने की प्रवृत्ति के मद्देनजर इस वर्ग को भी एचआईवी संक्रमण से बचाने के लिए नाको के परामर्श कार्यक्रम का हिस्सा बनाने की सलाह दी है।
मंत्रालय ने भी संसदीय समिति को इस दिशा में विचार-विमर्श का आश्वासन दिया है। पहले 16 साल की उम्र को यौन संबंधों की दृष्टि से काफी कम माना जाता था, लेकिन अब 15 साल की उम्र भी अधिक साबित हो रही है।
बसपा सांसद ब्रजेश पाठक की अध्यक्षता वाली इस 31 सदस्यीय समिति ने अपनी सिफारिश में इस मान्यता को गलत ठहराया है कि 15 साल से कम उम्र के किशोर यौन संबंधों में सक्रिय नहीं होते।
समिति ने कहा है कि विभिन्न अध्ययनों से इस बात की पुष्टि हुई है कि इस आयु वर्ग के किशोर भी यौन संबंध बनाने में सक्रिय हैं।
इसलिए स्वास्थ्य मंत्रालय यह मान कर न चले कि किशोरों में एचआईवी का संक्रमण एचआईवी ग्रसित माता-पिता या यौन संबंधों से इतर माध्यमों से हो रहा है।
इसके साथ ही समिति ने एचआईवी से बचने के लिए नाको के परामर्श संबंधी इंटीग्रेटेड काउंसलिंग एंड टेस्टिंग सेंटर एडवाइस (आईसीटीसीए) का हिस्सा बनाने की सिफारिश की है।
गौरतलब है कि अब तक नाको 18 वर्ष से अधिक उम्र वर्ग के लोगों को ही आईसीटीसीए का हिस्सा बनाता है।
पाठक ने अमर उजाला को बताया कि यह तथ्यात्मक रूप से बिल्कुल सही है कि 18 साल से कम उम्र के बच्चे भी यौन संबंध बनाने में सक्रिय हैं।
चूंकि ऐसे बच्चों को सही-गलत का ज्ञान नहीं होता, इसलिए समिति ने कुछ सदस्यों के सुझाव पर इस आशय की सिफारिश स्वास्थ्य मंत्रालय से की है।
पाठक ने कहा कि चाहे कारण कुछ भी हो, लेकिन 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चे यौन संबंध मामले में सक्रिय हो रहे हैं। ऐसे में इन्हें एचआईवी से बचने के परामर्श के साथ ही सेक्स शिक्षा दिए जाने की भी जरूरत है। हमें इस सच्चाई को स्वीकार करना चाहिए।