विंध्याचल मंदिर में रविवार की रात करीब ढाई बजे तीर्थ पुरोहितों (पंडों) और पुलिस में जमकर लाठियां चलीं। मारपीट में दारोगा, दो सिपाही और चार पंडे घायल हो गए। पंडे अपने यजमानों को बिना बारी के वीआईपी दर्शन करना चाहते थे और पुलिस ने उन्हें ऐसा करने से रोका, यही झगड़े की वजह बताई जाती है।
हालांकि आला अधिकारियों ने मंदिर पहुंचकर मामला को शांत कराया, पर केस दर्ज होने की खबर पर पंडे भड़क गए और शाम चार बजे मंदिर परिसर में धरने पर बैठ गए। बाद में एसपी सुरेशचंद्र पांडेय ने ये कहकर धरना खत्म कराया कि किसी के खिलाफ कोई केस दर्ज नहीं किया जाएगा।
रविवार रात दर्शनार्थियों का दबाव बढ़ा तो मंदिर में तैनात एक क्षेत्राधिकारी के इशारे पर जवानों ने उन पंडों को टोकना शुरू किया जो अपने यजमानों को लेकर वीआईपी लाइन के बीच में घुस रहे थे, खास लोगों को निकास द्वार से प्रवेश करा रहे थे और माता का चरण स्पर्श करा रहे थे।
रात करीब ढाई बजे बवाल एक पुरोहित अपने यजमानों को लेकर वीआईपी लाइन में खड़ा हो गया। वहां तैनात दारोगा ने जब उन्हें रोका तो बात बढ़ गई। दारोगा व कुछ सिपाहियों ने उस पंडे को पीट दिया। साथ ही आस-पास जो भी लाल कुर्ता पहने (पंडों के ड्रेस) दिखा उस पर लाठियां बरसाईं।
पंडे हवन कुंड की तरफ भागे और दरवाजा अंदर से बंद कर खुद को बचाया। भनक लगने पर अन्य पंडे भी मौके पर पहुंच गए। इस बीच हवन कुंड में छिपे पंडे भी हाथ में लाठियां लेकर बाहर आ गए और उन्होंने पुलिस पर हमला बोल दिया। हमले में एक दारोगा और दो जवान घायल हो गए। बीच-बचाव करने पहुंचे सीओ लालगंज एसपी सिंह भी पंडों के गुस्से का शिकार हो गए।