भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और पूर्वी उत्तर प्रदेश के दलित नेता विजय सोनकर शास्त्री ने यह दावा अपनी किताब में किया है। शास्त्री ने दावा किया है कि देश के अंदर दलितों की बहुत सी जातियां शुरुआत में ब्राह्मण और क्षत्रिय समाज में शामिल थी।
ईटी की खबर के मुताबिक उन्होंने अपनी पुस्तक में मुस्लिम आक्रामण को ब्राह्मणों और क्षत्रियों के दलित बन जाने की वजह बताया है। उन्होंने दावा किया है कि मुस्लिम आक्रामण की वजह से इन्हें जाति व्यवस्था में नीचे धकेल दिया गया। विजय सोनकर शास्त्री ने अपनी पुस्तक 'हिदूं वाल्मीकि जाति' पुस्तक में इस बात का उल्लेख किया है।
पिछले दिनों की इस पुस्तक का विमोचन आरआरएस प्रमुख मोहन भागवत ने किया था। पुस्तक विमोचन के समय ही मोहन भागवत कहा था कि दलितों को 100 साल तक आरक्षण मिलना चाहिए। छुआछूत और सामाजिक भेदभाव को मिटाने के लिए यह बात बहुत जरूरी है।
धर्म को बचाने के लिए बन गए दलित
शास्त्री ने कहा कि संघ प्रमुख मोहनराव भागवत 3 किताबें लॉन्च की हैं। उन्होंने बताया कि यह किताबें उन सभी दलित जातियों को सामाजिक स्वीकार्यता देने की मांग करती हैं, जो कभी अगड़ी जातियां(ब्राह्मण और क्षत्रिय) हुआ करती थीं।
धर्म को बचाने की खातिर इन जातियों को छोटे काम करने के लिए मजबूर होना पड़ा। जिन्होंने धर्म बदलने से इनकार किया, उन्हें मजबूर कर दिया गया। आपको बताते चले कि विजय सोनकर शास्त्री राष्ट्रीय अनूसूचित जाति और जनजाति आयोग के पूर्व चेयरमैन भी रह चुके हैं।
भाजपा प्रवक्ता का कहना है कि हमारा देश 2 हजार सालों तक आक्रमणों से जूझता रहा और हमारे देश के खजाने को लूटा जाता रहा। अपनी पुस्तक में उन्होंने दावा किया है कि वाल्मीकि समुदाय पर किए गए अध्ययन से पता चलता है कि इस समुदाय से संबंधित 10 फीसदी लोग ब्राह्मण और 90 फीसदी लोग क्षत्रिय समुदाय से जुड़े हुए थे।
पुस्तक के मुताबिक युद्घ हार जाने वाले राजपूतों को जमादार बनने पर मजबूर कर दिया गया था। उनके किताब के मुताबिक क्षत्रियों का सबसे ज्यादा शोषण कुतुबद्दीन ऐबक और लोदी के समय वर्ष 1200-1500 के बीच हुआ था।
सांप्रदायिक ध्रुवीकरण और उपचुनाव
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में चल रहे सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के दौर में भाजपा दलित समुदाय को उसका इतिहास बताने की कोशिश में लगी है।
पिछले दिनों भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने भी एक समाचार चैनल पर इंटरव्यू के दौरान कहा था कि अगर उत्तर प्रदेश में ऐसे ही सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का माहौल बना रहा तो आगे सत्ता भाजपा के हाथ में होगी।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता की पुस्तक का उपचुनावों के इस दौर में आना काफी मायने रखता है। उत्तर प्रदेश में शनिवार को ही 11 विधानसभा और 1 संसदीय सीटों पर वोटिंग हुई है।
भाजपा नेता विजय सोनकर शास्त्री वाराणसी के रोहनिया के रहने वाले हैं और वहां पर भी मतदाता अपने मतदान का प्रयोग कर रहे हैं। वहीं सांप्रदायिक तनाव का केंद्र बन चुके पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 4 सीटों पर मतदान हो रहा है।