पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के रिश्ते में भाई लगने वाले अरुण नेहरू राजनीति के कुशल खिलाड़ी थे। उन्होंने सियासी मंच पर छोटी लेकिन बेहद मजबूत पारी खेली।
1980 के दशक में राजनीति की दुनिया में आने से पहले अरुण नेहरू सफल कारोबारी थे। वे जेनसन एंड निकोलन कंपनी के अध्यक्ष थे।
इंदिरा गांधी ने जब उन्हें राजनीति में आने का न्योता दिया तो उन्होंने कारोबारी दुनिया को अलविदा कर यहां भी मजबूत पैठ बनाई।
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1984 में जब भारी बहुमत से राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने अरुण नेहरू को अपनी सरकार में गृह राज्य मंत्री की अहम जिम्मेदारी दी।
हालांकि बोफोर्स मसले को लेकर अरुण नेहरू और राजीव गांधी के बीच मतभेद पैदा हो गए और अरुण्ा कांग्रेस पार्टी से अलग हो गए।
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केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने उन पर मंत्री पद पर रहते चेकोस्लोवाकिया के साथ पिस्तौल संबंधी एक डील में सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया।
हाल में उच्चतम न्यायाल ने इस मामले में कार्यवाही पर रोक लगा दी थी।