सेना प्रमुख जनरल बिक्रम सिंह ने सरकार के समक्ष स्पष्ट कर दिया है कि चीनी घुसपैठ से निपटने के लिए सख्ती दिखाना बेहद जरूरी हो गया है।
प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में बुधवार को कैबिनेट की सुरक्षा मामलों की समिति (सीसीएस) की बैठक में लद्दाख के दौलत बेग ओल्डी में चीनी सेना की घुसपैठ के संदर्भ में सेना प्रमुख ने मुख्य रूप से तीन विकल्प सुझाए।
उन्होंने यह भरोसा भी दिया कि इन विकल्पों को अमलीजामा पहनाने के लिए सेना ने पूरी तैयारी कर ली है।
समझा जाता है कि सेना प्रमुख ने सीसीएस के समक्ष घुसपैठ स्थल पर सप्लाई लाइन काटने, घुसपैठ स्थल ही नहीं बल्कि इससे आगे बढ़ कर अक्साई चिन इलाके में आक्रामक गश्त करने का विकल्प सरकार को दिया है।
सेना ने इस दौरान चीनी सेना से आमने-सामने की झड़प होने के खतरे को भी उठाने के लिए तैयार रहने का सुझाव दिया। हालांकि इस मसले पर अभी सरकार ने राजनीतिक फैसला नहीं लिया है।
सरकार अब भी घुसपैठ को कूटनीतिक प्रयासों से सुलझाने के विकल्प को ही आगे बढ़ाने की अपनी रणनीति पर कायम है।
प्रधानमंत्री निवास पर हुई कैबिनेट की बैठक के बाद हुई सीसीएस की बैठक में समिति के सदस्यों के अतिरिक्त राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, रॉ और आईबी प्रमुख के समक्ष सेना प्रमुख ने लगभग सवा घंटे तक विस्तार से पूरे हालात की जानकारी दी।
इस दौरान उन्होंने यह भी बताया कि चीन के साथ तीसरी फ्लैग मीटिंग में भी कोई नतीजा नहीं निकला। चीन का कहना है कि भारत द्वारा सीमा के पास किए गए स्थायी निर्माण का इलाका विवादास्पद है।
उसकी आपत्ति है कि जब अभी तक संबंधित इलाके के स्वामित्व का विवाद नहीं निपटा है तब भारत ने ऐसे इलाकों में स्थायी निर्माण कर उकसाने वाली कार्यवाही की है।
हालांकि सरकारी सूत्रों का कहना है कि सरकार कूटनीतिक तथा कार्यकारी तंत्र की प्रक्रिया से विवाद का हल निकालने के अंतिम सीमा तक जाएगी।
अगर 8 मई तक विवाद का हल नहीं निकला तो विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद अपनी 9 मई की चीन यात्रा के दौरान इस मामले को राजनीतिक स्तर पर चीनी विदेश मंत्री के साथ उठाएंगे।
सेना प्रमुख ने सुझाए तीन विकल्प
सबसे पहले घुसपैठ स्थल पर चीनी सैनिकों के लिए रसद की आपूर्ति रोकने के लिए सप्लाई लाइन को काटना बेहद जरूरी है।
इसके बाद भारत को चीनी सैनिकों से आमना सामना और तनातनी की परवाह न करते हुए न केवल घुसपैठ स्थल के बेहद नजदीक बल्कि अक्साई चीन के इलाके में आक्रामक गश्त शुरू करनी चाहिए।
इस दौरान चीनी सेना से आमने-सामने की झड़प होने के खतरे को भी उठाने के लिए तैयार रहने का सुझाव दिया। इससे संदेश जाएगा कि भारत ने घुसपैठ को अपनी प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया है।
चीनी सैनिकों का रुख आक्रामक
भारतीय सीमा में 19 किमी भीतर चौकी बना चुके चीनी सैनिकों के तेवर बेहद आक्रामक दिख रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक पांच टेंट लगाकर डटे करीब 40 चीनी सैनिकों को ट्रकों और छोटे वाहनों के जरिए रोजाना रसद पहुंचाई जा रही है।
भारतीय सेना मानव रहित विमानों (यूएवी) की मदद से इलाके में चीनी गतिविधियों पर नजर रखे हुए है।
लद्दाख के लोग नाराज
सूत्रों के मुताबिक चीनी घुसपैठ पर भारत के नरम रुख से लद्दाख के स्थानीय लोगों में गुस्सा है।