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प्यार था या हवस, जिसने मचा दी तबाही

Fri, 07 Mar 2014 03:03 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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सेक्स की हवस में वह अंधी हो चुकी थी। जिस मां-बाप ने उसे पैदा किया, जिस दादा की गोद में वह पली बढ़ी और जिन भाई-बहनों के साथ खेलते हुए वह जवान हुई, उन सब को एक ही पल में उसने मिटा डाला।
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सुनहरी आंखों वाली इस कातिल लड़की का नाम सोनम है। यह हरियाणा के रोहतक में कबूलपुर गांव की रहने वाली है। इस लड़की ने एक ऐसे नरसंहार को अंजाम दिया है, जिसे पढ़कर आप की रूह भी कांप जाएगी।

वर्ष 2009 में दिल दहलाने वाले इस हत्याकांड में इस युवती ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर अपने परिवार के ही सात सदस्यों को मौत की नींद सुला दिया था।

आगे की स्लाइड में पढ़िए यह था मामला

हत्या के बाद मौके पर ही किया था सेक्स

बहुचर्चित कबूलपुर हत्याकांड में सोनम ने अपने प्रेमी नवीन के साथ मिलकर 14 नवंबर, 2009 की रात को अपने ही परिवार के सात लोगों की हत्या कर दी थी। हत्या करने के बाद सोनम और नवीन ने वहीं लाशों के पास सेक्स भी किया।

सभी के शव 15 नवंबर को सुबह घर में पड़े मिले थे। मरने वालों में सोनम की मां प्रोमिला, पिता सुरेंद्र, दादी भूरा, भाई अरविंद, चचेरे भाई-बहन विशाल, सोनिका व मोनिका शामिल थे।

हत्याकांड के चार दिन बाद यह राज खुला था कि सोनम ने ही प्रेमी के साथ मिलकर परिवार वालों को मौत के घाट उतारा था। उससे पहले सोनम व नवीन ने इस पूरे मामले को लूट का मामला दिखाने का प्रयास किया था।

नशे की गोलियां देकर सबको बेसुध कर दिया

बताया जाता है कि सोनम और उसके प्रेमी नवीन का साथ परिवार वालों को रास नहीं था, जिसको लेकर अक्सर घर में झगड़ा होता रहता था। इसलिए सोनम और नवीन ने मिलन में बाधा बन रहे परिजनों को जान से मारने की साजिश रच डाली।

सबसे पहले नवीन ने अपने एक दोस्त जसबीर से नशे की गोलियां मंगवाई। जसबीर अपने कैमिस्ट दोस्त ओमबीर से नशे की 100 गोलियां लेकर आया। सोनम ने सभी गोलियां खाने में मिलाकर अपने परिजनों को दे दी।

नशीला खाना खाने के बाद सभी बेसुध हो गए। इसी का फायदा उठाकर सोनम ने अपने प्रेमी नवीन (22 वर्ष) उर्फ मोनूको बुला लिया तथा दोनों ने मिलकर सातों लोगों का गला दबाकर की हत्या कर दी थी।

किस-किस को उतारा था मौत के घाट

सोनम ने अपनी दादी भूरी देवी (60 वर्ष), पिता सुरेंद्र सिंह (40 वर्ष), मां प्रमिला (38 वर्ष), भाई अरविंद (18), चाचा भूपेंद्र की बेटियों सोनिका (14 वर्ष) व मोनिका (12 वर्ष) तथा चचेरे भाई व भूपेंद्र के बेटे विशाल (8 वर्ष) को कपड़े से गला घोंटकर मार डाला।

घटना के बाद सोनम व नवीन ने इस पूरे मामले को लूट का मामला दिखाने का प्रयास किया था। सात लोगों की हत्या किए जाने के बाद घर में रखी नगदी व जेवरात लेकर प्रेमी नवीन झज्जर जिले के छारा गांव में चला गया था।

नवीन व सोनम चाहते थे कि पूरा मामला लूट का लगे तथा उनकी साजिश का पर्दाफाश नहीं हो सके। जिससे वे पुलिस कार्रवाई से बच सकें। लेकिन कानून के हाथों भला आज तक कोई अपराधी बच सका है।

कातिल प्रेमी जोड़े को कोर्ट ने दी फांसी

इस मामले में नवीन व सोनम के अलावा जसबीर व ओमबीर को भी आरोपी बनाया गया था। कोर्ट ने सोनम और उसके प्रेमी नवीन व नवीन के दोस्त जसबीर को दोषी करार दिया। जबकि इस हत्याकांड में ड्रग्स एक्ट के तहत नामजद एक अन्य युवक ओमबीर को कोर्ट ने बरी कर दिया।

सोनम और उसके प्रेमी नवीन को फांसी की सजा सुनाई गई है। हत्याकांड में सहयोगी नवीन के ममेरे भाई जसबीर को भी उम्रकैद की सजा मिली है।

अदालत के फैसले के बाद मुकदमे में वादी सोनम के चाचा भूपेंद्र सिंह ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि वह इस फैसले से संतुष्ट हैं। वहीं बचाव पक्ष ने हाईकोर्ट में जाने की बात कही है। फैसला सुनने के बाद सोनम के चेहरे पर कोई अपराध बोध नहीं था, जबकि नवीन भी भावशून्य ही नजर आया।

रिश्तों का कत्ल करते हुए नहीं कांपे थे हाथ

कोर्ट ने कहा फैसला सुनाते हुए कहा कि 'हम आपको इसलिए दोषी मानते हैं कि आपने अपने अवैध संबंधों को बचाने के लिए सात निर्दोष लोगों की हत्या कर दी। इनमें तीन मासूम बच्चे भी हैं।'

'आपने साजिशन जघन्यतम हत्याकांड को अंजाम दिया। यह अचानक हुई किसी प्रतिक्रिया का परिणाम नहीं है। पूरे होश-हवास में सोच-समझ कर रणनीति बनाई गई।'

'सबसे ज्यादा दरिंदिगी की बात यह कि मौका ए वारदात, गवाहों-मुजरिमों के बयान और हालात से साबित हुआ है कि सोनम और नवीन ने दादी भूरा की हत्या कर उसके शव के पास ही सेक्स संबंध बनाए।'

'इससे ज्यादा हैवानियत की बात और क्या होगी? इसीलिए यह मामला दुर्लभ से दुर्लभतम श्रेणी में आता है।'
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कबूलपुर में न रिश्ते आते हैं, न रिश्ते कबूल होते हैं

हैवानियत की हद पार करने वाली घटना को याद कर लोग आज भी सिहर उठता है। सोनम और नवीन ने जो कदम उठाया, उसने यहां के युवाओं के लिए कई रास्ते बंद कर दिए। हालत यह है कि गांव में शादी के लिए रिश्ता नहीं आता।

गांव के लोग अगर शादी के लिए जाएं तो उनसे रिश्ता कबूल नहीं किया जाता। युवकों को रोजगार देने में आस-पास के लोग कतराते हैं। अदालत में जब सोनम और नवीन को फांसी की सजा सुनाई गई तो उनके चेहरे बता रहे थे, जैसे उन्हें कोई पछतावा नहीं है।

उस समय 19 वर्ष की रही सोनम अब 24 साल की होने को है। यह उम्र जिंदगी को संवारने की होती है, लेकिन इसी मुकाम पर उसकी जिंदगी पर सवालिया निशान लग रहा है।
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