गोरक्षा के नाम पर भले ही प्रदेश में बड़े-बड़े दावे हो रहे हों, बुंदेलखंड में भूख से मर रही गायों को बचाने में न तो प्रशासन की दिलचस्पी है और न जनप्रतिनिधियों की। बांदा अतर्रा के देवनाथ चौरिहन पुरवा की अस्थाई गोशाला है। जहां एसडीएम और विधायक के वादे के बावजूद गायों को कोई राहत नहीं मिली। अंतत: गोशाला की 200 गायों को छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। यह हाल तब है जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुंदेलखंड में अन्ना जानवरों के प्रति खुद संजीदा हैं।
अतर्रा ग्रामीण के चौरिहन पुरवा के ग्रामीणों ने अन्ना प्रथा पर लगाम लगाने के लिए अनूठी पहल की। सर्वसम्मति से ग्रामीणों ने अस्थाई गोशाला बनाकर लगभग 200 से ज्यादा मवेशियों को बंद कर दिया। उनके लिए दाना-पानी की व्यवस्था भी खुद ग्रामीणों ने की। तीन माह तक जैसे-तैसे अन्ना गायों का पेट भरा, लेकिन अब उनके संसाधन जवाब दे गए। क्षेत्रीय विधायक राजकरन कबीर और उप जिलाधिकारी भी हर संभव राहत की बात कहकर भूल गए। अनदेखी और लापरवाही ने ग्रामीणों को छुट्टा मवेशियों को फिर छुट्टा करने के लिए मजबूर कर दिया। अंतत: मंगलवार को ग्रामीणों ने पशुबाड़ा में बंद सभी 200 गायों और बछड़ों को मुक्त कर दिया।
छुट्टा करने के अलावा दूसरा रास्ता नहीं था : संरक्षक
अन्ना मवेशियों को छोड़ देने पर खाली पड़ा ग्रामीणों का पशुबाड़ा
अतर्रा। ग्रामीणों की सर्वसम्मति से अस्थाई गोशाला के संरक्षक बने शंभू प्रसाद त्रिपाठी ने बताया कि अन्ना जानवरों का पेट भरने के लिए वह खुद ट्रैक्टर पर आसपास के गांवों से पुआल ढोकर लाते रहे। लेकिन अब ग्रामीणों ने भी सहयोग से हाथ खींच लिया। मजबूरन अन्ना मवेशियों को मुक्त करने के अलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं बचा था। विधायक और एसडीएम से भी मदद के लिए प्रार्थना पत्र दिया, लेकिन किसी ने तवज्जो नहीं दी। यह भी बताया कि अन्ना मवेशियों को गोशला लाने से गांव की लगभग 300 बीघा से ज्यादा की गेहूं फसल सफाचट होने व पैरों तले रौंदने से बच गई।
प्रधान व एसडीएम ने मदद नहीं की, अफसोस: राजकरन
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अतर्रा के क्षेत्रीय विधायक राजकरन कबीर ने कहा कि अतर्रा ग्रामीण के प्रधान से उन्होंने गोशाला में बंद गायों के लिए चारा-पानी की व्यवस्था करने के लिए कह दिया था। एसडीएम को भी हरसंभव मदद करने के लिए कहा था। लेकिन किसी ने संज्ञान नहीं लिया हैरत की बात है। उन्होंने कार्रवाई का भरोसा दिया।
गोशाला की जानकारी नहीं थी : एसडीएम
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बांदा के उप जिलाधिकारी अवधेश कुमार श्रीवास्तव का जवाब हैरत भरा रहा। उनका कहना था कि उन्हें गोशाला के बारे में जानकारी नहीं थी। न ही किसी ने उन्हें प्रार्थना पत्र दिया और न ही कोई जानकारी दी। यह भी कहा कि मदद ऐसे नहीं दी जा सकती। गोशाला का पंजीकरण जरूरी है। जबकि पूर्व एसडीएम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए नायब तहसीलदार से जांच कराई थी। गायों की मदद के लिए पैरवी भी की, लेकिन स्थानांतरण हो जाने के बाद उनकी कोशिश ठंडे बस्ते में चली गईं।
जेल अधीक्षक ने गोद लीं दो अन्ना गायें
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बांदा मंडल कारागार वरिष्ठ जेल अधीक्षक हरबख्श सिंह ने अन्ना दो गायों को गोद लिया है। अपने हाथों से उनकी सेवा करते हैं। सुबह और शाम अपने खर्च से उनका पेट भर रहे हैं। पानी के लिए बाहर नाद रखे हैं। अधीक्षक का गाय प्रेम देखकर कारागार सुरक्षा कर्मी भी सेवा से नहीं चूकते। श्री सिंह ने बताया कि उनका संकल्प है जब तक वह यहां रहेंगे गोमाता की सेवा करते रहेंगे।