कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने का दिया था निर्देश
उन्होंने विवि प्रशासन, कमिश्नर, डीएम सभी को पत्र लिखा, लेकिन किसी ने नहीं सुनी। इंदुमती ने बताया कि कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया था, न कि वेतन रोकने का, इसके बावजूद वेतन नहीं दिया गया और आर्थिक कमी से इलाज में दिक्कतें बढ़ गईं।
सीएसए कैंपस में लाया गया था पार्थिव शरीर
विवि से नाराज डॉ. पाठक के परिजन मंगलवार सुबह उनका शव लेकर सीधे विवि पहुंचे। हंगामे की सूचना पर वहां पर पहले से ही पुलिस फोर्स तैयार थी। उनके पिता डॉ. रामकृष्ण पाठक ने कहा कि सीएसए के कई शिक्षक और छात्र उनके अंतिम दर्शन करना चाहते थे। इस कारण पार्थिव शरीर सीएसए कैंपस में लाया गया था।
सभी आरए का मामला कोर्ट में विचाराधीन
यहां श्रद्धांजलि के बाद शव को भैरव घाट ले जाया गया। विवि के कुलपति डॉ. आनंद कुमार सिंह ने कहा कि शिक्षक पद पर काम कर रहे सभी आरए का मामला कोर्ट में विचाराधीन है। उन्हें 5400 ग्रेड पर वेतन देने का निर्देश एक सप्ताह पहले जारी कर दिया गया था।
यह मामला है कोर्ट में
सीएसए में रिसर्च असिस्टेंट (आरए) का मामला कोर्ट में विचाराधीन है। विवि में कुछ शिक्षकों की नियुक्ति आरए पद पर हुई थी। इसमें से डॉ. पाठक भी शामिल थे। आरए को प्रमोट कर सहायक आचार्य का ग्रेड पे दिया जाने लगा। 2022 को यह शासनादेश आया कि आरए शिक्षक की श्रेणी में नहीं शामिल किए जाएंगे।
आरए का वेतन रोक दिया गया था
इनका ग्रेड पे भी कम किया जाएगा। इस पर शिक्षक कोर्ट चले गए। अंत में कोर्ट ने मामले में विवि के कुलपति को निर्देशित किया है कि वह तय करें कि आरए शिक्षक हैं या नहीं। इसको लेकर शिक्षक पद पर काम कर रहे आरए का वेतन रोक दिया गया था। अप्रैल से शिक्षक पद पर काम कर रहे किसी भी आरए को वेतन नहीं मिला है।
जिस विवि को दिया जीवन, उसने नहीं दिया साथ
मैंने और मेरे बेटे ने संस्थान को अपना पूरा जीवन दे दिया, लेकिन अफसोस रहा कि मेरे बेटे की बीमारी में संस्थान ने मेरा सहयोग नहीं किया। अंतिम समय में मेरा साथ छोड़ दिया। अब इतनी गुजारिश है कि बेटे का फंड का पैसा और उसकी पत्नी को नौकरी मिल जाए ताकि जीवनयापन में परेशानी न हो। यह बात रुंध गले से डॉ. आरके पाठक के पिता और सीएसए के मृदा विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. राधाकृष्ण पाठक ने कही।
खेत पहले ही बिक चुके थे
उन्होंने कहा कि मेरा बेटा का पैसा ही उसको इलाज के लिए नहीं मिल सका। इलाज काफी महंगा था। दो-दो लाख के दो इंजेक्शन लगे। तीसरा इंजेक्शन लगने का पैसा नहीं था। खेत पहले ही बिक चुके थे। उनकी पत्नी ने कई जगह गुहार लगाई, लेकिन पैसे का बंदोबस्त नहीं हो पाया। उसकी दो बेटियां हैं, जिनकी अभी तक शादी भी नहीं हुई है।
मेरे पति के साथ कुछ हुआ तो विवि प्रशासन जिम्मेदार
डॉ. पाठक की पत्नी डॉ. इंदुमती ने विवि को लिखे पत्र में स्पष्ट लिखा था कि धनाभाव के कारण इलाज में व्यवधान आ रहा है, अगर कुछ विपरीत घटना होती है तो विवि प्रशासन जिम्मेदार होगा।