वे पहले भी कई बेटियों की शादी करा चुके हैं और आज उनकी तीन बेटियों प्रीती, राधा और सुमन की एक साथ शाम चार बजे शादी होनी है। मुख्यमंत्री अपनी पत्नी के साथ अपनी तीनों का कन्यादान करेंगे। जिसके लिए मुख्यमंत्री अपनी पत्नी साधना सिंह चौहान के साथ कल देर रात विदिशा पहुंच चुके हैं।
मुख्यमंत्री ने तीनों बेटियों से मिलकर उन्हें आशीर्वाद दिया और आश्रम के संचालकों को धन्यवाद दिया। दरअसल मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री की ये तीनों बेटियां गोद ली हुई है। जिसके लालन-पालन की जिम्मेदारी उन्होंने सुंदर सेवा आश्रम को दी थी। तब से ये बेटियां यहीं है। आज उन बेटियों की शादी है। इसलिए मुख्यमंत्री शादी की तैयारी का जायजा लेने के लिए कल ही विदिशा पहुंच गए थे। बुधवार को माता पूजन और मेहंदी की रस्म हुई। जिसमें साधना सिंह मौजूद रहीं।
विज्ञापन
बेटियों के लालन-पालन की जिम्मेदारी आश्रम को सौंप दी थी, बेटियों की विदाई से दुखी हैं सीएम
मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वे तीनों बेटियों को 1998 में अपने साथ लाए थे और लालन-पालन की जिम्मेदारी आश्रम को दी थी। तब वे सब ढाई-तीन साल की थीं। उनका कोई अभिभावक नहीं था, तो मैंने इन्हें अपने पास रखने का निर्णय लिया। साधना जी ने इनका लालन-पालन बड़े प्यार से किया और आज हमारी इन बेटियों का विवाह है। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी ने शादी की तैयारियां पहले ही कर ली थी और इस मौके पर हम बहुत खुश हैं। उन्होंने बताया कि दोनों पति-पत्नी मिलकर अब बेटियों का कन्यादान करेंगे। पूरे धूम-धाम से सभी वैदिक रीति-रिवाजों से शादी होगी। उन्होंने कहा कि बेटियों का भविष्य कैसे बेहतर बने, इसके लिए हम दोनों निरंतर प्रयास करते रहे। उनके विवाह के रूप में आज एक बड़ा दायित्व पूरा हो रहा है। बेटियों के भावी मंगलमय जीवन को देखते हुए मन में संतोष का भाव है, तो उनकी विदाई से दु:ख भी।
पहले भी करा चुके हैं कई बेटियों की शादी
शिवराज सिंह चौहान इससे पहले भी कई लड़कियों को गोद ले चुके है। उनमें से एक भारती जिसकी शादी भी हो गई थी उनकी 2019 में हार्ट अटैक से मौत हो गई। उनकी दूसरी धर्मबेटी रिंकी की भी शादी हो चुकी है।
विज्ञापन
मुख्यमंत्री ने बताया कि जब मैं विधायक था, तब हमने एक बेटी की शादी की थी। उस बिटिया का विवाह करवाकर मुझे असीम शांति मिली। फिर सांसद रहते हुए गरीब बेटियों का विवाह प्रारंभ किया। सीएम बनने के बाद मैंने 'मुख्यमंत्री कन्यादान योजना' प्रारंभ की और फिर बेटियों के कल्याण के लिए लाडली लक्ष्मी योजना भी शुरू की। उन्होंने कहा कि एक ज़िम्मेदार नागरिक होने के नाते मैं यह सोचता हूँ कि ऐसे बच्चे, जिनका कोई नहीं है, उन्हें कैसे सड़क पर छोड़ दिया जाए! इसी सोच से जन्मी है मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना। इसके अंतर्गत अनाथ बच्चों की शिक्षा की व्यवस्था, रु. 5,000 प्रतिमाह पेंशन, राशन की व्यवस्था की जाती है।