आपदा प्रबंधन में अहम हिस्सा माने जाने वाले अग्निशमन विभाग को बिना शक्तियों के ही आपदा पर नियंत्रण का जिम्मा थमा दिया गया है। प्रदेश अग्निशमन विभाग जिस फायर फाइटिंग एक्ट 1984 के तहत काम कर रहा है, उसके आज तक रूल तक नहीं बन सके।
रूल न बनने की वजह से विभाग सिर्फ आग लगने की घटना के समय ही किसी परिसर में कदम रख सकता है, लेकिन सामान्य समय में वह अग्नि सुरक्षा मानकों की जांच करने के लिए प्रवेश ही नहीं कर पा रहा। जाहिर है अग्निशमन विभाग की अधूरी शक्तियों का फायदा उठाकर लोग खुद भी अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। विभाग भी उन्हें सुरक्षित रहने के लिए बाध्य नहीं कर पा रहा।
हाल ही में आपदा प्रबंधन की तैयारियों को लेकर हुई बैठक में शासन ने अग्निशमन विभाग को निर्देश दिए कि वह सभी भवनों की अग्नि सुरक्षा का ऑडिट करे। इस निर्देश के बाद विभाग ने जिला स्तर पर भी अपने अधिकारियों को आडिट करने के आदेश जारी कर दिए, लेकिन आदेश जारी होने के बाद भी विभाग के अधिकारी कुछ खास नहीं कर पा रहे।
कारण, अग्निशमन एक्ट 1984 के रूल नहीं बने हैं, जिसकी वजह से विभाग को किसी भवन का औचक निरीक्षण या फायर ऑडिट करने का अधिकार ही नहीं है। अगर कोई व्यक्ति विभाग के पास आवेदन करता है तो ही वह परिसर में प्रवेश कर फायर ऑडिट कर सकता है। खास बात यह है कि विभाग ऑडिट करने के बाद कमियां बता तो सकता है, लेकिन उन्हें सख्ती से पूरा कराने के लिए भी बाध्य नहीं कर सकता। जाहिर है बिना शक्तियों के अग्निशमन विभाग महज आपदा होने पर ही काम कर पा रहा है।