उत्तराखंड प्रदेश के स्कूली पाठ्यक्रम में कक्षा एक से दसवीं तक अब गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी के साथ ही रं (धारचूला में भोटिया जनजाति) को भी शामिल किया जाएगा।
लोक भाषाओं के संबंध में मुख्यमंत्री हरीश रावत के निर्देश के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आ गया है। एससीईआरटी की निदेशक कुसुम पंत बताती हैं कि इसी महीने प्रदेश की छह डायटों (जिला शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान) में कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं, इसमें विषय विशेषज्ञ पाठ्य सामग्री तैयार करेंगे।
प्रदेश में 75 लाख से अधिक लोग गढ़वाली और कुमाऊंनी बोलते एवं समझते हैं। कई पुस्तकें गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी में प्रकाशित हुई हैं। विभिन्न विश्वविद्यालयों में इन भाषाओं पर शोध हो रहे हैं, लेकिन प्रदेश के स्कूली पाठ्यक्रम में इन्हें शामिल नहीं किया गया है।