विश्वविद्यालय में शिक्षक नियुक्ति मामले पर उच्च न्यायालय का फैसला आने के बाद अब विवि को भर्ती परिणाम निकालने और चयन की प्रक्रिया तय करनी होगी। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एडीएन वाजपेयी ने कहा कि न्यायालय के आदेशों का पालन किया जाएगा, प्रति कुलपति और डीएस व कुलसचवि, डीन लॉ और डीन साइंस की एक कमेटी बना दी गई है। यह कमेटी फैसले के हर पहलू पर चर्चा करेगी, विशेषज्ञों से रॉय लेगी, उसके बाद 12 अक्तूबर तक चयन और लिफाफे खोलने पर फैसला ले लिया जाएगा।
यह मामला 2012 से हाईकोर्ट में विचाराधीन था। विश्वविद्यालय को हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और यूजीसी के तय नेट/सेट/एसएलईटी के मानकों को ध्यान में रखकर ही नियुक्ति के लिफाफे खोलने होंगे। इससे यूजीसी मानकों के तहत 2009 के बाद पीएचडी को मिली छूट के तहत आवेदन और साक्षात्कार देने वाले दौड़ से बाहर हो जाएंगे।
अलग से कमेटी का गठन
न्यायालय ने विवि को इसमें सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व में आए फैसलों के मुताबिक ही नियुक्ति करने के आदेश दिए हैं। पिछली 37 नियुक्तियों के मामले की प्रक्रिया तय कर उसके मुताबिक ही 2014 में शुरू की गई 200 सहायक आचार्य के पदों के अब तक हो चुके साक्षात्कार की भर्ती भी इन्हीं नियमों के तहत करनी होगी।
कुलपति प्रो. एडीएन वाजपेयी ने उच्च न्यायालय का फैसला आने के बाद एक अलग से कमेटी बनाकर फैसले से जुड़े हर पहलू पर चरचा करने और इस पर कानूनी रॉय लेने के आदेश दिए हैं। इसकी जिम्मेवारी प्रति कुलपति प्रो. राजेंद्र सिंह चौहान को सौंपी है। अक्तूबर को भर्ती एवं साक्षात्कार में शामिल हुए पात्र उम्मीदवारों के चयन और लिफाफे खोलने पर फैसला आ जाएगा।
भर्ती शर्तों को लेकर था विवाद
पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में सहायक आचार्य के करीब 37 पदों के लिए तय की पात्रता शर्तों में जिसमें 2009 के बाद यूजीसी नियमों के तहत पीएचडी को नेट/सेट/एसएलईटी की शर्त से छूट दी थी। मामला कोर्ट के विचाराधीन था। अब उच्च न्यायालय ने अपना फैसला दे दिया है। इसमें विवि को नेट/सेट/एसएलईटी की पात्रता शर्त के साथ ही, सर्वोच्च न्यायालय के सुशीला केस मामले में मार्च 2015 में आए फैसले को ध्यान में रखकर ही शिक्षकों का चयन करने के आदेश दिए हैं।
एचपीयू ने तीन बार बदली थी पात्रता शर्तें- प्रदेश विवि ने विवादों में आई सहायक आचार्य भर्ती के बाद 2014 में विज्ञापित किए 200 पदों की पात्रता शर्त को तीन बार बदला था। पहले पीएचडी को इसमें छूट दी। बाद में ईसी की बैठक में सिर्फ नेट/सेट/एसएलईटी को ही शिक्षक पदों के लिए पात्र होने का फैसला दिया। अंत में विवि फिर से उसी पुरानी पात्रता शर्त को लागू करने पर आ गया। इसमें पीएचडी को छूट दे दी।