देश में एक्सप्रेस वे निर्माण की बढ़ती जरूरत को देखते हुए नई एक्सप्रेस वे अथॉरिटी के गठन को लेकर सरकार फिर सक्रिय हो गई है। कई साल से यह मामला सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, योजना आयोग और एनएचएआई के बीच झूल रहा है। दिल्ली से जयपुर और चडीगढ़ के बीच प्रस्तावित एक्सप्रेस की योजना में तेजी लाने के लिए एक्सप्रेस वे अथॉरिटी के गठन की घोषणा जल्द हो सकती है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। मंगलवार को इस मुद्दे पर मंत्रालय, योजना आयोग और एनएचएआई की अहम बैठक है।
मंत्रालय के उच्च अधिकारियों का कहना है कि यमुना एक्सप्रेस वे की तर्ज पर बनने वाले दिल्ली-जयपुर और दिल्ली-चंडीगढ़ एक्सप्रेस वे भी पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत बनेंगे, लेकिन इनका फाइनेंशियल मॉडल अलग होगा है। मंगलवार को होने वाली बैठक में इस मॉडल का अंतिम रूप दिया जा सकता है। इसके अलावा एक्सप्रेस वे अथॉरिटी के गठन पर विचार किया जाएगा।
गौरतलब है कि शुरुआत में मंत्रालय और एनएचएआई ने नई अथॉरिटी बनाने के योजना आयोग के सुझाव को नकार दिया था, लेकिन अब एक्सप्रेस वे निर्माण के जटिल मुद्दों और एनएचएआई पर बढ़ते परियोजनाओं के बोझ को देखते हुए इनके रुख में बदलाव आया है। सबसे पहले योजना आयोग ने वर्ष 2007 में देश में 18 हजार किलोमीटर के एक्सप्रेस वे बनाने के लिए एक्सप्रेस वे अथॉरिटी के गठन का सुझाव दिया था।
दिल्ली से जयपुर और चडीगढ़ के बीच नए एक्सप्रेस वे के लिए बुनियादी मास्टर प्लानिंग पूरी हो चुकी है, लेकिन इसके वित्तीय योजना को अंतिम रूप दिया जाना बाकी है। मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि निजी भागीदारी से बनने वाले इन दोनों एक्सप्रेस वे का मॉडल थोड़ा अलग हो सकता है। इसमें सरकार सिर्फ सड़क के लिए जमीन अधिग्रहण में मदद करेगी, जबकि आसपास रीयल एस्टेट विकसित करने के लिए निजी भागीदार को खुद जमीन खरीदनी होगी।
धीमी प्रगति पर पीएमओ सख्त
हाईवे निर्माण में धीमी प्रगति को लेकर सख्त प्रधानमंत्री कार्यालय ने एनएचएआई और सड़क मंत्रालय से बड़ी परियोजनाओं का ब्योरा मांगा है। सोमवार को सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के आला अधिकारियों के साथ बैठक में पीएमओ ने एक हजार करोड़ रुपये से बड़ी परियोजनाओं की प्रगति की विस्तृत रिपोर्ट देने का कहा है।
उल्लेखनीय है कि इस साल राजमार्ग मंत्रालय करीब 9,500 किलोमीटर के लक्ष्य के मुकाबले करीब 1,100 किलोमीटर के ठेके ही अवार्ड कर पाया है। गत दिसंबर में बीओटी के तहत एनएचएआई एक भी किलोमीटर हाईवे अवार्ड नहीं कर सका है। मंत्रालय ने पीएमओ से हाईवे क्षेत्र के लिए राहत पैकेज, जल्द मंजूरी और कई तरह की रियायतें मांगी हैं।