सीआईआई ने आगामी बजट में लघु एवं मध्यम उद्यम (एसएमई) को बढ़ावा देने के लिए बेहतर उपाय किए जाने की मांग की है। उद्योग संगठन ने सरकार से मांग की है कि ऐसे कर प्रावधानों पर पुनर्विचार किया जाए, जो इस क्षेत्र के विकास पर विपरीत प्रभाव डाल रहे हैं।
बजट पूर्व वित्त मंत्रालय को भेजे अपने सुझावों में सीआईआई ने कहा कि सरकार को एसएमई पर लगाए गए ऐसे कर प्रावधानों पर पुनर्विचार करना चाहिए, जिससे उनकी विस्तार क्षमता प्रभावित हो रही है। संगठन ने कहा है कि चालू वित्त वर्ष के बजट में भागदारी वाली कंपनियों और पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनियों सहित सभी कारोबारी प्रतिष्ठानों पर 18.5 प्रतिशत की दर से वैकल्पिक न्यूनतम कर (एएमटी) लगा दिया गया था।
वास्तव में यह कर न्यूनतम वैकल्पिक कर का विस्तार है। सरकार एमएटी के तहत ऐसी कंपनियों को कर के दायरे में लाई थी, जो शून्य कर का भुगतान करती हैं।
सरकार ने एएमटी के माध्यम से सभी छोटी कंपनियों पर बड़ी कंपनियों की तरह कर लगा दिया और छोटी कंपनियों की सिर्फ 20 लाख रुपये की प्रारंभिक आय को इसके दायरे से बाहर रखा गया। सीआईआई ने कहा कि एएमटी लगाए जाने से एसएमई पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।