क्या आप कल्पना कर पाएंगे कि महज एक शाकाहारी जूस पीकर कोई मर्द नपुंसक बन सकता है। जी हां भारत के आदिवासी इलाकों में गर्भ निरोध के लिए अभी भी जूस और जड़ी बूटी कारगर साबित होती हैं।
भारत के आदिवासी इलाकों में गर्भ निरोध के लिए आधुनिक नहीं बल्कि परंपरागत तरीकों का बोलबाला है। यहां देसी जड़ी बूटियों और रस द्वारा गर्भ निरोध की प्रक्रिया अपनाई जाती है जो अपने आप में रोचक है।
मध्य प्रदेश की बैगा जनजाति का नाम शायद आपने नहीं सुना होगा। इस जनजाति के लोग अपने आपको सुषेण वैद्य (लक्ष्मण को संजीवनी बूटी देने वाले वैद्य) के वंशज बताते हैं।
इस जनजाति में वैद्य गर्भ निरोध के लिए मर्दो को केले के तने का रस पिलाते हैं। जी हां इनका दावा है कि केले के तने का रस पिलाने से मर्द की संतानोत्पत्ति कमजोर हो जाती है।
इस जनजाति में परिवार नियोजन के लिए केले के तने का रस बहुत लोकप्रिय गर्भनिरोधक है। आमतौर पर भी यही माना जाता है कि केले के तने के रस से पुरुषों में संतान पैदा करने की क्षमता कम हो जाती है।
दूसरी तरफ इस जनजाति में महिलाओं को बहला ककोरा नामक जड़ी बूटी की जड़ गुड़ और मदिरा में मिलाकर खिलाई जाती है। कहते हैं कि ये जड़ी बूटी औरत में संतान पैदा करने की शक्ति को समाप्त कर देती है।