लेकिन इन घोषणाओं पर सवाल
- बकाया गन्ने का भुगतान- अभी तक नहीं पूरा हुआ ये वादा। आरोप है कि अभी तक आठ हजार करो़ड़ रुपये से ज्यादा का बकाया है।
- कॉलेज जाने वाले छात्रों को लैपटॉप-एक जीबी डाटा- इस वायदे को पूरा करने में सरकार असफल रही। भाजपा नेताओं ने कोरोना काल को कारण बताया।
किसानों और विपक्ष के आरोप
भाजपा के तमाम दावों के बीच विपक्ष ने उत्तर प्रदेश सरकार को विफल बताया है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष विश्वविजय सिंह ने बताया कि योगी आदित्यनाथ सरकार हर मोर्चे पर असफल साबित हुई है। प्रदेश में लगातार महिलाओं के साथ दुष्कर्म सहित अपराध बढ़े हैं। हाथरस कांड जैसी घटनाओं ने प्रदेश सरकार के कड़े अनुशासन वाले प्रशासन की छवि को धूमिल कर दिया है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि कोरोना काल में श्रमिकों को पैदल आने का जो कष्ट उठाना पड़ा है, उसे उत्तर प्रदेश का श्रमिक कभी भूल नहीं पाएगा। इस दौरान उसके साथ केवल कांग्रेस खड़ी रही। प्रियंका गांधी और प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने श्रमिकों को आने-जाने से लेकर उनके भोजन-पानी तक की व्यवस्था की। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में गंगा किनारे जमीन में दफनाई गई लाशें अब दोबारा उखड़कर सामने आ रही हैं और योगी सरकार के विकास के दावों की कलई खोल रही हैं।
किसान नेता चौधरी पुष्पेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार ने गन्ने की डेढ़ गुनी कीमत देने की बात कही थी। गन्ना विकास बोर्ड के अनुसार गन्ना उत्पादन में लगभग 300 रुपये प्रति क्विंटल की लागत आती है। इस प्रकार इसका मूल्य 450 रुपये प्रति क्विंटल होना चाहिए, लेकिन अभी भी यह 325 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है। गन्ने का आठ हजार करोड़ रुपये से ज्यादा बकाया है। डीजल-खाद-बिजली की कीमतें बढ़ी हैं जिससे कृषि उपज की लागत बढ़ी है। सरकार गेहूं-धान की फसलों की खरीद का दावा जरूर करती है, लेकिन अभी भी किसानों की पूरी फसल नहीं खरीदी जा रही है।