मुंबई महानगर विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) की तरफ से कोरोना संकट काल में मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कांप्लेक्स (बीकेसी) में बनाए गए कोविड सेंटर में भ्रष्टाचार के जांच की फाइल अब लोकायुक्त जस्टिस एमएल तहलियानी के पास पहुंच गई है। उधर, बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने भी अपने हाथ खड़े कर दिये हैं। बीएमसी आयुक्त इकबाल सिंह चहल ने राज्य सरकार से कह दिया है कि कोविड सेंटर के लिए खर्च हुए रकम का भुगतान नहीं कर सकते।
मुंबई में कोरोना संक्रमण के चरमकाल के दौरान जून महीने में एमएमआरडीए ने बीकेसी में कोविड सेंटर का निर्माण कराया था, जहां करीब एक हजार कोरोना के मरीजों के उपचार के लिए तंबू लगाए गए थे और अन्य मेडिकल सुविधाओं के प्रबंध किए गए थे।
आरोप है कि इस कोविड सेंटर के निर्माण में बाजार दर से करीब तीन गुना ज्यादा पैसे खर्च किए गए और खर्च का बिल बीएमसी को भेज दिया गया था कि वह इस रकम का भुगतान करे। बीएमसी में भाजपा पार्षद दल के नेता विनोद मिश्र ने इसके खिलाफ आवाज उठाई थी।
उन्होंने आरोप लगाया था कि एमएमआरडीए ने कॉमनवेल्थ घोटाले में शामिल गुड़गांव की कंपनी को कोविड सेंटर बनाने का ठेका दिया था, जिसमें बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है। इसको लेकर पूर्व मंत्री व विधायक आशिष शेलार और विनोद मिश्र राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मिले थे और मामले की जांच कराने की मांग की थी। अब राज्यपाल ने इसकी जांच की जिम्मेदारी लोकायुक्त को सौंप दी है।
कांग्रेस ने भी किया था विरोध
बीकेसी कोविड सेंटर में खर्च हुए 59.29 करोड़ का बिल बीएमसी को भेजे जाने पर कांग्रेस पार्षद व विपक्ष के नेता रविराजा ने भी इस पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा था कि कोविड सेंटर के बिल का भुगतान बीएमसी को नहीं करना चाहिए।
एमएमआरडीए के पास दस हजार करोड़ रुपये से ज्यादा रकम जमा है। उसमें से उसे कोविड सेंटर में खर्च का भुगतान करना चाहिए। रविराजा का आरोप है कि कोरोना काल में भी सभी की नजर बीएमसी की तिजोरी पर है।