डीजे बजाने को लेकर शुरू हुआ विवाद इतना बढ़ गया कि मामला चाकूबाजी और हत्या तक पहुंच गया। इस जघन्य एवं सनसनीखेज मामले में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय उमरिया ने चार आरोपियों को हत्या के मामले में दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है। न्यायालय ने सभी चारों को आजीवन कारावास से दंडित किया है। इसके अलावा अन्य धाराओं में भी सजा और अर्थदंड लगाया गया है। न्यायालय का फैसला 15 अक्टूबर 2026 को आया।
मीडिया प्रभारी अभियोजन नीरज पाण्डेय के अनुसार, घटना 5 अगस्त 2021 की है। ग्राम उजनिया में राजू कोल की बेटी शीतल कोल के जन्मदिन का कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसमें रिश्तेदारों और गांव के लोगों के साथ शिवा सेन, रवि सेन, गोलू रजक और राजा सेन भी शामिल हुए थे। कार्यक्रम के दौरान डीजे बजाकर नाच-गाना चल रहा था। सभी लोग अपनी पसंद के गाने बजवाने लगे, इसी दौरान रात करीब 9:30 बजे गुलाब कोल डीजे के केबल निकालकर अपने घर चला गया, जिससे डीजे बंद हो गया।
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घर पहुंचकर गाली-गलौज और मारपीट
अभियोजन के मुताबिक, डीजे बंद होने के बाद शिवा सेन और रवि सेन गुलाब कोल के घर पहुंचे और केबल मांगने लगे। गुलाब के मना करने पर आरोपियों ने उसके साथ गाली-गलौज और मारपीट शुरू कर दी। कुछ देर बाद गोलू रजक और राजा सेन भी वहां पहुंच गए। चारों आरोपियों ने मिलकर गुलाब कोल के साथ मारपीट की।घटना के दौरान बीच-बचाव करने पहुंचे सोनू कोल, शिवचरण कोल, धीरज कोल और अन्य लोगों ने विवाद शांत कराने की कोशिश की। इसी बीच शिवा सेन ने चाकू से गुलाब कोल के सीने पर वार कर दिया। इसके बाद राजा सेन ने धीरज कोल के पेट में और रवि सेन ने शिवचरण कोल के सीने में चाकू मार दिया। हमले में तीनों गंभीर रूप से घायल हो गए। वारदात के बाद आरोपी मोटरसाइकिल से मौके से फरार हो गए।
घायलों को उपचार के लिए जिला अस्पताल उमरिया ले जाया गया। गुलाब कोल की गंभीर हालत को देखते हुए चिकित्सकों ने उसे जबलपुर रेफर किया, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। मामले में थाना उमरिया में अपराध क्रमांक 396/2021 के तहत हत्या, हत्या के प्रयास, गाली-गलौज और एससी-एसटी एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया था।
न्यायालय ने सुनाई सजा
अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और प्रभावी पैरवी के आधार पर न्यायालय ने आरोपियों के विरुद्ध अपराध प्रमाणित पाया। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रियदर्शन शर्मा ने विवेक उर्फ गोलू रजक, प्रकाश उर्फ राजा सेन, रवि सेन और शिवा उर्फ विकास सेन को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/34 के तहत आजीवन कारावास तथा 1,000 रुपये अर्थदंड से दंडित किया। चारों को धारा 307/34 के तहत सात-सात वर्ष के सश्रम कारावास और 500 रुपये अर्थदंड की सजा भी सुनाई गई। इसके अतिरिक्त शिवा उर्फ विकास सेन को आयुध अधिनियम की धारा 25(1-बी)(बी) के तहत दो वर्ष का सश्रम कारावास और 500 रुपये अर्थदंड से दंडित किया गया। प्रकरण में प्रभावी संचालन और सशक्त पैरवी उप निदेशक अभियोजन उमरिया आरके चतुर्वेदी ने की।