उज्जैन पहुंचा मां नर्मदा का पानी
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महाकाल की नगरी उज्जैन के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। शहर की प्यास बुझाने और पेयजल संकट से निपटने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के विशेष निदेर्शों के बाद मां नर्मदा का पानी उज्जैन पहुंचना शुरू हो गया है। गुरुवार से गंभीर डेम स्थित इंटकवेल और गऊघाट जल शोधन संयंत्र में नर्मदा जल की आवक शुरू हो गई है, जिससे शहर की पेयजल व्यवस्था को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि इस राहत के साथ-साथ जिले में कम बारिश के कारण पैदा हुए गंभीर जल संकट और किसानों की फसलों को बचाने को लेकर एक बड़ी चुनौती भी खड़ी हो गई है।
गौरतलब है कि इस वर्ष उज्जैन शहर और जिले में सामान्य औसत की तुलना में लगभग 24 इंच कम बारिश दर्ज की गई है। मानसूनी बेरुखी के कारण जिले का मुख्य जल स्रोत कहा जाने वाला गंभीर डेम पूरी तरह भर नहीं सका। वर्तमान स्थिति यह है कि गंभीर डेम में अब केवल 600 एमसीएफटी पानी ही शेष बचा है। सामान्य तौर पर यह पानी शहर की पेयजल आवश्यकताओं के अनुसार लगभग चार महीने तक पर्याप्त माना जाता है लेकिन वर्तमान परिस्थितियों ने प्रशासन और आमजन की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
फसलों और शहर की जलापूर्ति के बीच कशमकश
गंभीर डेम के कैचमेंट क्षेत्र के आसपास स्थित करीब दो दर्जन गांवों में कम वर्षा के कारण सिंचाई का भयंकर संकट पैदा हो गया है। अन्नदाता किसान अपनी खड़ी फसलों को सूखने से बचाने के लिए मजबूरन डेम से पानी ले रहे हैं।
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एक तरफ शहर की प्यास बुझाने को लेकर उज्जैन शहर को नियमित और सुचारू पेयजल आपूर्ति के लिए निरंतर पानी की आवश्यकता है। वहीं दूसरी तरफ किसानों का भविष्य किसानों के सामने उनकी खून-पसीने की मेहनत से उगाई गई फसलों को बचाने का संकट है। इन दोनों के बीच संतुलन बिठाना अब जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग के लिए सबसे बड़ी परीक्षा बन गया है। यदि डेम से इसी प्रकार सिंचाई के लिए पानी की निकासी जारी रही, तो उपलब्ध जल भंडार तेजी से घट सकता है, जिससे आगामी महीनों में शहर के पेयजल पर भी विपरीत असर पड़ सकता है।
प्रशासन के सामने प्रभावी जल प्रबंधन की चुनौती
गऊघाट प्लांट तक नर्मदा जल के पहुंचने से गंभीर डेम पर शहर की निर्भरता कुछ हद तक कम जरूर होगी लेकिन संकट पूरी तरह टला नहीं है। प्रशासन के समक्ष अब मुख्य चुनौती यह है कि नर्मदा के जल की नियमित आवक हो। शहर की दैनिक खपत और किसानों की सिंचाई के पानी के बीच एक सटीक तालमेल और निगरानी रखकर ही समस्या का समाधान किया जा सकता है।