उज्जैन के फिल्मकार देवांश भट्ट द्वारा महिला सुरक्षा पर आधारित फिल्म 'ग्रोप्ड' (Groped) को दादा साहब फाल्के अंतरराष्ट्रीय फिल्म अवॉर्ड की शॉर्ट फिल्म कैटेगरी में टॉप 100 फिल्मों में चुना गया है।
टॉप 100 के बाद टॉप 21 का चयन किया जाएगा। मार्च-अप्रैल 2024 में चार अलग श्रेणियों फिक्शन, नॉन फिक्शन, डॉक्यूमेंट्री, और शॉर्ट फिल्म में अवॉर्ड वितरित किए जाएंगे। ग्रोप्ड शॉर्ट फिल्म श्रेणी की टॉप 100 में चुनी गई है। शॉर्ट फिल्म 20 से 30 मिनट की रहती हैं। गत दिनों मुंबई में आयोजित हुए दादा साहब फाल्के अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में विश्व भर के 60 से अधिक देशों की 10,000 से ज्यादा फिल्मों का प्रदर्शन किया गया।
महिला सुरक्षा पर केंद्रित है ग्रोप्ड
महिला सुरक्षा और महिला सशक्तिकरण को दर्शाती ग्रोप्ड फिल्म को देवांश भट्ट फिल्म्स, प्रथमेश सांजेकर फिल्म्स और पार्थ प्रोडक्शन द्वारा बनाया गया। देवांश ने अमर उजाला को बताया कि इस फिल्म को लेकर हमने 2021 में तैयारी शुरू कर दी थी। साल भर तक फिल्म लिखने के बाद वर्ष 2022 जुलाई में इसकी शूटिंग की शुरुआत की गई, जिसके बाद दिसंबर अंत तक फिल्म तैयार हो पाई। यह फिल्म सत्य घटनाओं पर आधारित है।
फिल्म के बारे में देवांश ने बताया कि ग्रुप्ड में हमने महिला सुरक्षा के बारे में यह बताने की कोशिश की है कि जब महिलाएं मेहनत कर आगे बढ़ती हैं तो उन्हें लोगों की गंदी मानसिकता का किस प्रकार सामना करना पड़ता है। उनकी सच्ची मेहनत और प्रयास को अनदेखा कर किस प्रकार से उनके साथी और समाज उनकी उपलब्धि के गलत मायने ही निकालता है। देवांश ने बताया कि इस डॉक्यूमेंट्री फिल्म के पहले मैंने धार्मिक फिल्मों पर काफी कार्य किया है। लेकिन जब फिल्म के डायरेक्टर प्रथमेश सांजेकर महिला सुरक्षा पर आधारित इस फिल्म की कहानी लेकर मेरे पास पहुंचे तो फिल्म की कहानी पढ़ने के बाद हमने सबसे पहले मुंबई व अन्य बड़े शहरों में होने वाली महिलाओं के साथ छेड़छाड़ और फिल्म में दिखाई जा रही बातों को देखा और उसके बाद इस सच्चाई से सभी को रूबरू कराने के लिए इस फिल्म को बनाया।
पुणे एवं मुंबा फिल्म फेस्टिवल में मिल चुका है अवॉर्ड
देवांश इसके पहले भी इंटरनेशनल अवार्ड जीत चुके हैं। इनके पिताजी स्वर्गीय भूषण भट्ट प्रख्यात रंगकर्मी थे। फिल्म को इसके पहले भी पुणे शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल एवं मुंबा फिल्म फेस्टिवल में अवॉर्ड मिल चुका है। फिल्म ग्रुप्ड की शूटिंग पुणे शहर में हुई है, जिसके लेखक एवं निर्देशक प्रथमेश सांजेकर हैं एवं फिल्म के डायरेक्टर ऑफ फोटोग्राफी देवांश भट्ट हैं। प्रोड्यूसर पार्थ सूर्यवंशी हैं। फिल्म की शूटिंग सात दिन चली, जिसमें मराठी फिल्म इंडस्ट्री के प्रख्यात कलाकार विकास हांडे, अश्विनी बागल और मंगेश पवार ने अभिनय किया है।