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MP News: इस्कान के मायापुर मुख्यालय में प्रतिष्ठित होगी उज्जैन में बनी श्रील प्रभुपादजी की मूर्ति

Mon, 16 Jan 2023 11:42 AM IST
अरविंद कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन

सार

मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले में बनी श्रील प्रभुपादजी की मूर्ति अब पश्चिम बंगाल के मायापुर में बन रहे विश्व के सबसे बड़े इस्कान मंदिर में प्रतिष्ठित होगी। श्रील प्रभुपादजी के साथ उनके चार गुरुओं की मूर्तियां भी स्थापित की जाएंगी।
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श्रील प्रभुपादजी की मूर्ति - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पश्चिम बंगाल के मायापुर में बन रहे विश्व के सबसे बड़े इस्कान मंदिर में, उज्जैन में बनी श्रील प्रभुपादजी की मूर्ति प्रतिष्ठित होगी। श्रील प्रभुपादजी के साथ उनके चार गुरुओं की मूर्तियां भी स्थापित की जाएंगी। इन मूर्तियों की खास बात यह है कि यह सैंकड़ों साल तक खराब नहीं होती हैं। इन सभी मूर्तियों का निर्माण रियलस्टिक मूर्तिकार अमल भक्तदास प्रभुजी ने किया है।

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प्रभुअमल भक्तदास ने बताया, उज्जैन में इस्कान मंदिर का निर्माण चल रहा था। पूज्य गुरुदेव भक्तिचारू स्वामीजी महाराज श्रील प्रभुपादजी जैसी दिखाई देने वाली हूबहू मूर्ति बनवाना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने देश-विदेश से अनेक मूर्तिकारों को बुलवाया, लेकिन उनकी पसंद के अनुसार कोई भी मूर्ति नहीं बना पाया। फिर मैंने उनसे मूर्ति बनाने का निवदेन किया, उन्होंने कहा तुम भी कोशिश करके देख लो। गुरु आज्ञा मिलने पर मैंने मूर्ति बनाई, जिसे देखकर वे भाव विभोर हो गए और उस दिन से यहां मूर्ति प्रोजेक्ट की शुरूआत हुई।

इस्कान मंदिर में होता है मूर्ति का निर्माण...
उज्जैन के इस्कान मंदिर में विश्व का पहला रियलस्टिक मूर्ति निर्माण संस्थान है। यहां बनी हुई मूर्तियां देश-विदेश के कोने-कोने में भेजी जाती हैं। इसका संचालन रियलस्टिक मूर्तिकार अमल भक्तदास प्रभु द्वारा किया जाता है। उनके हाथों के जादू का ही कमाल है कि मार्बल डस्ट से निर्मित मूर्तियां सजीव लगती हैं। भक्तों को इन मूर्तियों को देखकर जीवंत होने का आभास होता है। यही कारण है कि देश और विदेश में कहीं भी श्रील प्रभुपादजी अथवा इस्कान के अन्य गुरुओं की मूर्ति प्रतिष्ठित करना हो, मूर्ति का निर्माण उज्जैन इस्कान मंदिर में ही होता है।
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मार्बल डस्ट से बनाई जाती है मूर्तियां...
रियलस्टिक मूर्ति बनाने के लिए मार्बल डस्ट में रेजिन तथा कलर पिगमेंट कैमिकल के साथ फायबर मिलाया जाता है। सूखने के बाद यह मिश्रण पत्थर की तरह सख्त हो जाता है। इससे बनी मूर्तियां सैकड़ों साल तक खराब नहीं होती हैं। मूर्ति निर्माण संस्थान में साढ़े चार इंच से छह फीट तक की मूर्तियों का निर्माण किया जाता है। इन मूर्तियों की कीमत 1500 रुपये से लेकर पांच लाख रुपये तक है। इस्कान के अलावा कोई भी व्यक्ति अथवा संस्थान अपने यहां स्थापित करने के लिए यहां मूर्ति बनवा सकते हैं।

ऐसा रहेगा इस्कान का मुख्यालय...
पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में मायापुर स्थित इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ कृष्णा कॉन्शियसनेस (इस्कॉन) के मुख्यालय में दुनिया का सबसे बड़ा वैदिक मंदिर बन रहा है। साल 2024 में इस मंदिर का निर्माण पूरा होने की संभावना है। दुनिया के सबसे बड़े वैदिक तारामंडल मंदिर में 100 मिलियन डॉलर की लागत लगने की संभावना है। यह जब बनकर तैयार हो जाएगा, तो कंबोडिया के 400 एकड़ बड़े अंगकोर वाट मंदिर परिसर की जगह दुनिया का सबसे बड़ा वैदिक मंदिर बन जाएगा।

दुनिया में सबसे बड़ा धार्मिक स्मारक बनने के अलावा यह सबसे बड़ा गुंबद भी होगा और यह पश्चिम बंगाल में वैदिक तारामंडल का मंदिर इस्कान के मुख्यालय के रूप में काम करेगा। बता दें कि वैदिक तारामंडल मेहमानों को ब्रह्मांडीय निर्माण के विभिन्न हिस्सों का भ्रमण कराएगा। इसमें बह्मांड से संबंधित विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी जाएगी और लोगों को वैदिक संस्कृति के बारे में अवगत कराया जाएगा। यह आगरा के ताजमहल और वेटीकन के सेंट पॉल कैथेड्रल से भी बड़ा होगा।

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