शहर में पैड गरबे की अनुमति निरस्त होने के बाद युवाओं ने विरोध का अनोखा तरीका अपनाया। धरना-प्रदर्शन करने के बजाय Gen Z के युवक-युवतियां हिंदूवादी नेता अर्जुन सिंह भदोरिया के घर पहुंचे और धन्यवाद यात्रा निकाली। घर के बाहर गरबा किया गया, माता के स्वरूप में आई युवती की आरती उतारी गई और नेता को दुपट्टा पहनाकर सम्मानित किया गया। इस घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में चर्चा का माहौल बन गया।
दरअसल, शहर में पिछले कई वर्षों से व्यावसायिक यानी पैड गरबा आयोजित करने वाले युवाओं के एक समूह की अनुमति इस बार निरस्त कर दी गई। आयोजकों का आरोप है कि हिंदूवादी नेता अर्जुन सिंह भदोरिया ने थाने का घेराव कराकर आयोजन की अनुमति रद्द करवाई, जिससे उन्हें लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। इसी के विरोध में युवाओं ने अनूठे अंदाज में अपनी नाराजगी जाहिर की।
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क्षीर सागर से निकाली यात्रा, घर के बाहर किया गरबा
सिर पर लाल चुनरी बांधे, माथे पर तिलक लगाए और हाथों में माता की चुनरी लेकर सैकड़ों युवक-युवतियां क्षीर सागर से ‘जय माता दी’ के नारे लगाते हुए निकले। यात्रा हिंदूवादी नेता अर्जुन सिंह भदोरिया के घर पहुंची। वहां युवाओं ने गरबा किया, बालिकाओं को माता के स्वरूप में बैठाकर उनकी आरती उतारी और प्रसाद वितरित किया। अर्जुन सिंह भदोरिया के घर के बाहर आने पर युवाओं ने उन्हें दुपट्टा पहनाकर सम्मानित किया और पैड गरबे की अनुमति निरस्त होने पर धन्यवाद दिया। घटनाक्रम की सूचना मिलते ही कोतवाली थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने स्थिति को संभालते हुए दोनों पक्षों को समझाइश दी और शांति बनाए रखने की अपील की।
युवाओं को धर्म से जोड़ना है उद्देश्य: आयोजक
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे अनिकेत वर्मा ने बताया कि उनका उद्देश्य विरोध करना नहीं, बल्कि युवाओं को धर्म से जोड़ने के लिए कुछ अलग करना था। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों से वे सभी आवश्यक अनुमतियां लेकर गरबा आयोजित कर रहे थे। इस बार आयोजन के माध्यम से नौ देवियों का इतिहास प्रस्तुत करने की योजना थी।
वर्मा के अनुसार, आयोजन में सुरक्षा के लिए प्रवेश द्वार पर जांच और तिलक लगाने जैसी व्यवस्थाएं की जाती हैं। इसके बावजूद अनुमति निरस्त कर दी गई, जिससे आयोजकों को निराशा हुई।
आयोजकों ने 18 से 20 लाख रुपये के नुकसान का दावा किया
पैड गरबा आयोजक हर्षवर्धन राणा ने बताया कि बड़े आयोजनों के लिए सुरक्षा व्यवस्था, बाउंसर, साउंड सिस्टम, मंच, टेंट और होटल सहित कई व्यवस्थाएं पहले से करनी पड़ती हैं। इनके लिए अग्रिम भुगतान भी किया जाता है। राणा के मुताबिक, अनुमति अचानक निरस्त होने से आयोजकों को 18 से 20 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। टेंट, साउंड और अन्य व्यवस्थाओं के लिए दी गई रकम वापस मिलने की संभावना कम है। उन्होंने आर्थिक नुकसान को लेकर गहरी निराशा जताते हुए कहा कि स्थिति बेहद मुश्किल हो गई है। आयोजकों का कहना है कि गरबा आयोजन से कई युवाओं की धार्मिक भावनाएं जुड़ी होती हैं और वे पूरे साल नवरात्र में माता की आराधना के इस अवसर का इंतजार करते हैं। अनुमति निरस्त होने के बाद अब आयोजन से जुड़े लोगों को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ निराशा का भी सामना करना पड़ रहा है।
ऐसे जताया विरोध
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