राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े कारसेवक संतोष दुबे
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कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की प्रस्तावित सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा को लेकर अब राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े कारसेवक संतोष दुबे भी समर्थन में उतर आए हैं। उन्होंने वीडियो संदेश जारी कर राम जन्मभूमि में चढ़ावे की कथित चोरी का मुद्दा उठाया और आरोप लगाया कि सत्ता में बैठे लोग अब तक आरोपियों को पकड़ नहीं पाए हैं। दुबे ने 20 अक्टूबर को उज्जैन से शुरू होने वाली यात्रा में खुद शामिल होने की घोषणा करते हुए संतों, संन्यासियों और आम लोगों से भी इसमें भाग लेने की अपील की है। दुबे के समर्थन से दिग्विजय सिंह की यात्रा को लेकर धार्मिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो सकती है। यात्रा का घोषित मुद्दा मंदिरों की मर्यादा और चढ़ावे की कथित चोरी के खिलाफ आवाज उठाना है। दुबे ने इसे भगवान राम के आदर्शों से जोड़ते हुए कहा कि राम जन्मभूमि में चोरी करने वालों को दंड मिलना चाहिए।
सत्ता में बैठे लोग आरोपियों को नहीं पकड़ पाए
संतोष दुबे ने अपने वीडियो संदेश में आरोप लगाया कि राम जन्मभूमि में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में सत्ता में बैठे लोग कार्रवाई नहीं कर पाए हैं। उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह इस मुद्दे को अंजाम तक पहुंचाने के लिए आगे आए हैं। दुबे ने पूर्व मुख्यमंत्री को बहादुर और यशस्वी बताते हुए लोगों से यात्रा में शामिल होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह यात्रा केवल एक जगह से दूसरी जगह तक जाने का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि मंदिरों की मर्यादा और कथित अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाने का प्रयास है। हालांकि, चढ़ावे की चोरी को लेकर लगाए गए आरोपों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
यात्रा में शामिल हों, स्वागत भी करें
दुबे ने अयोध्या और प्रदेश के लोगों से अपील की कि वे पदयात्रा में सहभागी बनने के साथ इसका स्वागत भी करें। उन्होंने संतों, संन्यासियों, वैरागियों और गृहस्थों से आगे आने का आग्रह किया। दुबे के मुताबिक, वह स्वयं भी इस यात्रा में शामिल रहेंगे। उन्होंने अपने संदेश में भगवान राम की ओर से आसुरी शक्तियों पर विजय प्राप्त करने के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कथित चोरी के आरोपियों के खिलाफ आवाज उठाने को शंखनाद बताया। संदेश के अंत में उन्होंने जय सियाराम का उद्घोष किया।
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दो शंकराचार्यों के शुभकामना संदेश से भी चर्चा में यात्रा
दिग्विजय सिंह की यात्रा को ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और द्वारका शारदापीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती के शुभकामना संदेश भी मिल चुके हैं। अविमुक्तेश्वरानंद ने देवस्थानों की मर्यादा और मंदिरों में चढ़ावे की कथित चोरी के खिलाफ जनजागरण को धर्म-स्वाभिमान से जोड़ा, जबकि सदानंद सरस्वती ने धर्म और नीति के संबंध पर अपने विचार रखे। 20 अक्टूबर को विजयादशमी के दिन उज्जैन से शुरू होने वाली इस पदयात्रा के जरिए दिग्विजय सिंह मंदिरों की मर्यादा और चढ़ावे से जुड़े सवालों को उठाने की तैयारी में हैं। अब संतोष दुबे के समर्थन और शंकराचार्यों के शुभकामना संदेशों के बाद यात्रा को लेकर लोगों की नजर इस पर रहेगी कि इसमें धार्मिक क्षेत्र से कितनी भागीदारी होती है और उठाए गए आरोपों पर आगे क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।