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Ujjain News: हवा में लहराते हुए आया चाइनीज मांझा और काट दिया गला, युवक को आए 20 टांके, पकड़ने से हथेली भी कटी

Sat, 18 Jan 2025 12:50 PM IST
उज्जैन ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन

सार

परिजनों ने बताया कि इरशाद फाजलपुरा में ही संचालित होने वाले रोशन दवाखाने पर कंपाउंडर का काम करता है। वह अपने साथी के साथ बाइक पर जा रहा था। इस दौरान मांझे से उसका गला कट गया। डॉक्टरों ने करीब 20 टांके लगाए हैं।
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उज्जैन मे चायना काट रही लोगो का गला,  जानिए अब कौन बना इसका शिकार जिसे आए 20 से अधिक टांके
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विस्तार
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मकर संक्रांति का पर्व चार दिन पहले मनाया गया, लेकिन पतंगबाजी का सिलसिला अभी भी जारी है। इसके लिए प्रतिबंधित चायनीज मांझे का उपयोग किया जा रहा है, जो लोगों की जिंदगी को मुसीबत में डाल रहा है। शनिवार को मप्र के उज्जैन जिले से भी ऐसा ही एक मामला सामने आया। चाइनीज मांझे ने बाइक सवार युवक का गला और हाथ बुरी तरह से कट गया। गंभीर हालत में उसे चरक भवन लाया गया, जहां डॉक्टरों को उसके गले में 18 से 20 टांके लगाने पड़े। 

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बता दें कि दिसंबर महीने की शुरुआत के बाद ही प्रशासन ने चायना डोर पर प्रतिबंध लगा दिया था। पुलिस ने सर्चिंग अभियान चलाया और 20 से अधिक पतंग उड़ाने वालों के साथ 8 से 10 लोगों को चायना डोर बेचने के मामले में गिरफ्तार किया। इसके बाद भी चायना डोर से जमकर पतंग उड़ाई जा रही है। मकर संक्रांति के अवसर पर इस मांझे से 15 से अधिक लोग घायल हो गए थे। लेकिन, यह सिलसिला अभी तक नहीं थमा है।   

जानकारी के अनुसार, फाजलपुरा में रहने वाला मोहम्मद इरशाद (21) पिता मोहम्मद इस्माईल अपने साथी शादमान के साथ ढांचाभवन उद्योगपुरी से बाइक पर सवार होकर घर आ रहा था। अचानक हवा में आई चायना डोर उसके गले में उलझ गई। वह डोर को निकाल पाता, इससे पहले उसका गला लहूलुहान हो गया। उसने हाथ से डोर पकड़ ली, जिसे दूसरी ओर से खींचा जा रहा था, जिससे उसकी हथेली भी कट गई। 
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घायल हालत में इरशाद का साथी शादमान उसे चरक भवन लेकर पहुंचा, जहां डॉक्टरों ने 18 से 20 टांके लगाकर उपचार किया। सूचना पर चरक भवन पहुंचे इरशाद के परिजन उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उसे निजी अस्पताल ले गए, जहां उसका इलाज चल रहा है। परिजनों ने बताया कि इरशाद फाजलपुरा में ही संचालित होने वाले रोशन दवाखाने पर कंपाउंडर का काम करता है।

पतंग निकाल रही बालिका करंट की चपेट में आई
इधर, विवेकानंद कॉलोनी की झुग्गी बस्ती में रहने वाली 12 साल की बालिका आशा पिता देवीशंकर पतंग कटकर आने पर पास के मंदिर की छत पर चढ़ गई। उसने डोर पकड़कर बिजली के तारों में उलझी पतंग निकालने का प्रयास किया। लेकिन, इस दौरान उसे बिजली का झटका लग गया, जिससे वह बेहोश हो गई। उसके साथ 2 बच्चे और मंदिर की छत पर चढ़े थे, जो डरकर अपनी झोपड़ी में आकर छुप गए। जानकारी लगने पर लोगों ने बालिका को मंदिर की छत से नीचे उतारा और फिर उपचार के लिए चरक भवन पहुंचाया। डॉक्टरों ने आशा के हाथ बुरी तरह झुलसने पर उसे बर्न वार्ड में भर्ती किया है।

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