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Tikamgarh News: कारी खदान में अवैध खनन के आरोप, विधानसभा में मामला उठने के बाद हरकत में आया प्रशासन

Tue, 14 Apr 2026 07:01 PM IST
टीकमगढ़ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, टीकमगढ़

सार

विधानसभा तक पहुंचे कारी खदान विवाद ने अब प्रशासन को हरकत में ला दिया है, डीएफओ की टीम मौके पर पड़ताल के लिए पहुंच चुकी है। अब जांच रिपोर्ट के बाद स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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खदान पर जांच करती वन विभाग की टीम
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विस्तार
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टीकमगढ़। जिले की कारी स्थित एशिया की सबसे बड़ी पाइरोफ्लाइट (गौरा पत्थर) खदान में करोड़ों रुपए के कथित अवैध उत्खनन और परिवहन का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। यह मुद्दा न सिर्फ प्रशासनिक स्तर पर बल्कि जिले के कारी क्षेत्र में स्थित एशिया की सबसे बड़ी पाइरोफ्लाइट (गौरा पत्थर) खदान में करोड़ों रुपये के कथित अवैध खनन और परिवहन का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। मामला विधानसभा तक पहुंचने के बाद राज्य सरकार ने जांच के लिए तीन जिलों के डीएफओ की संयुक्त टीम गठित की, जिसने मंगलवार को मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया।
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कारी क्षेत्र की यह खदान लंबे समय से विवादों में रही है। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि यहां नियमों की अनदेखी कर बड़े पैमाने पर अवैध खनन किया जा रहा है। विधायक यादवेंद्र सिंह बुंदेला ने इस मुद्दे को उठाते हुए मुख्य वन संरक्षक को पत्र लिखकर शिकायत दर्ज कराई और बाद में इसे विधानसभा में भी उठाया।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कारी वन क्षेत्र क्रमांक-2 में खदान से डायस्पोर के परिवहन के लिए बिना अनुमति अवैध सड़क बनाई गई है। साथ ही मध्य प्रदेश खनिज निगम द्वारा टेंडर देने वाली संस्था पर भी नियमों का पालन न करने के आरोप हैं।
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ओम कंस्ट्रक्शन कंपनी को खनन का ठेका दिए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि कंपनी के पास भंडारण का वैध लाइसेंस नहीं है और गजानन कंपनी के नाम से पिटपास जारी कर नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है। इसके अलावा एक ट्रक में निर्धारित 19 टन की जगह करीब 35 टन तक पाइरोफ्लाइट भरकर ओवरलोडिंग की जा रही है।

विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि खदान क्षेत्र के आसपास करीब 12 किलोमीटर तक कोई धर्मकांटा (वजन मापने की व्यवस्था) नहीं है, जिससे ओवरलोडिंग को बढ़ावा मिल रहा है। साथ ही स्वीकृत सीमा से अधिक वन क्षेत्र में खनन किए जाने की भी आशंका जताई गई है।

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मामला विधानसभा में उठने के बाद सरकार ने पन्ना, छतरपुर और निवाड़ी जिलों के डीएफओ की संयुक्त जांच समिति बनाई। टीम ने कारी खदान का निरीक्षण कर विभिन्न बिंदुओं पर जांच शुरू कर दी है। समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
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उधर पहले ब्लैकलिस्ट होने के बावजूद ओम कंस्ट्रक्शन कंपनी को कम समय में दोबारा काम मिलने पर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि कंपनी के मालिक दुर्गा दीक्षित ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि खदान का संचालन पूरी तरह नियमों के तहत किया जा रहा है और सभी प्रक्रियाओं का पालन किया जा रहा है। फिलहाल जांच रिपोर्ट का इंतजार है, जिसके बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि खदान में वास्तव में अवैध खनन हुआ है या नहीं।
 

खदान पर जांच करती वन विभाग की टीम

 

खदान पर जांच करती वन विभाग की टीम

 

खदान पर जांच करती वन विभाग की टीम

 

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