छिंदवाड़ा जिले के चौरई तहसील के हरदुआ गांव में एक बाघ घुस आया था। जिले के पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष शैलेंद्र पटेल के कुएं में गिर गया। आज यानी गुरुवार सुबह शैलेंद्र पटेल कुएं की तरफ से आ रही आवाजों को सुनकर वहां पहुंचे, तो कुएं के अंदर बाघ को देखकर दंग रह गए।
काफी मशक्कत के बाद ट्रेंकुलाइज कर बाघ को कुएं से बाहर निकाल गया है। सूचना मिलते ही पेंच टाइगर रिजर्व की टीम मौके पर ही पहुंच चुकी थी। हरदुआ गांव पेंच नेशनल पार्क के बफर जोन से सटा हुआ है। ऐसे में ऐसा माना जा रहा है कि यही से बाघ गांव में आया होगा।
इससे पहले भी एमपी समेत कई राज्यों में बाघ दुर्घटना का शिकार होते रहे हैं। हाल ही में उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी स्थित दुधवा टाइगर रिजर्व में एक बाघ घाघरा नदी में चला गया और नदी के भंवर में फंस गया। बाद में बड़ी मुश्किल से बाघ को रेस्क्यू किया गया, बाघ के रेस्क्यू ऑपरेशन में काफी दुश्वारियां आती हैं। लेकिन फिर भी उन्हें हर संभव तरीके से पार्क प्रबंधन बचाने की कोशिश करता है। दुधवा टाइगर रिजर्व में इरिगेशन डिपोर्टमेंट और क्षेत्र के रहवासियों की मदद से घाघरा की धार से बाघ को निकालकर उसकी जान बचाई गई।
गौरतलब है, मध्य प्रदेश देश का टाइगर स्टेट है, इसे यह दर्जा बाघों के संरक्षण और उनकी वंश वृद्धि की वजह से मिला है. मगर यहां कई बार इसी तरह बाघ दुर्घटना का शिकार होकर जान गंवाते रहे हैं। ताजा मामले में भी कोशिश की जा रही है कि जल्द से जल्द बाघ को कुंए से निकाला जाए। एमपी में 526 बाघ हैं, बीते छह महीने में 28 बाघों की मौत हो चुकी है।