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Janmashtami 2025: घर में है भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलदाऊ जी का मंदिर; यह 100 साल से भी अधिक पुराना; कहानी क्या

Sat, 16 Aug 2025 03:06 PM IST
शिवपुरी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिवपुरी

सार

शिवपुरी के नीलगर चौराहे पर स्थित बलदाऊ जी का 100 साल पुराना मंदिर है। मुस्लिम आक्रांताओं से बचाने के लिए मंदिर का निर्माण एक घर में किया गया था। इस मंदिर पर जन्माष्टमी और बलराम जयंती पर विशेष आयोजन होते हैं।
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शिवपुरी का इकलौता बलदाऊ जी मंदिर।
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विस्तार
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जन्मअष्टमी के अवसर में देश भर में भगवान कृष्ण की पूजा-अर्चना की जा रही है। बलदाऊ जी भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई है। इनका मंदिर शिवपुरी शहर के पुरानी शिवपुरी नीलगर चौराहे के पास स्थित है। यह मंदिर लगभग 100 साल पुराना है। यह मंदिर एक मकान के अंदर स्थापित है। जन्माष्टमी के अवसर पर यहां भक्तों की कतारें लगी हुई हैं। मंदिर पर जन्माष्टमी और बलराम जयंती पर विशेष आयोजन होते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मंदिर 100 साल से भी अधिक पुराना है। बलदाऊ जी को शेषनाग का अवतार माना जाता है। उन्हें हलधर भी कहा जाता है क्योंकि वे अपने साथ हल रखते थे।

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चार पीढ़ियों से जारी है मंदिर की पूजा
प्राचीन बलदाऊ जी मंदिर के पुजारी बंटी बताते हैं कि  उनका परिवार चार पीढ़ियों से मंदिर में सेवा कर रहे है। उनके परदादा, दादा, और पिता समेत अन्य परिजन यहां पूजा करते आ रहे हैं। यह मंदिर से 100 साल से भी अधिक पुराना है। मंदिर घर में होने को लेकर स्थानीय लोग कहते हैं कि मुस्लिम शासकों के दौर में मंदिरों को क्षति पहुंचाई जा रही थी। ऐसे में मुस्लिम आक्रांताओं से बचाने के लिए बलदाऊ जी की प्रतिमा घर के अंदर स्थापित की गई थी,  तब से प्रतिमा यहीं विराजमान है।  

शिवपुरी का एकमात्र बलदाऊ जी का मंदिर
सामाजिक कार्यकर्ता मनीष शिवहरे बताते हैं कि यह शहर का इकलौता बलदाऊ जी का मंदिर है। इस मंदिर से लोगों की गहरी आस्था जुड़ी है। यहां की मूर्ति अत्यंत आकर्षक है। मंदिर 100 से 150 साल पुराना माना जाता है। यहां पूजा-अर्चना करने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं।

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बलराम जयंती पर हुए धार्मिक आयोजन
मंदिर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी से दो दिन पहले बलराम जयंती बड़े भक्ति भाव और उल्लास से मनाई गई। बलदाऊ जी को छप्पन भोग लगाया गया और फूलों से भव्य सजावट की गई। साथ ही भंडारे भी किया गया था। आज जन्माष्टमी पर भी श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे हैं।

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बलराम जी के बारे में कुछ रोचक बातें
कहा जाता है कि बलराम जी का जन्म देवकी के गर्भ से हुआ था, लेकिन कंस के भय से उनका भ्रूण रोहिणी के गर्भ में स्थानांतरित कर दिया गया। इसी कारण उनका एक नाम संकर्षण भी पड़ा। पुराणों के अनुसार भगवान बलराम जी शेषनाग के अवतार हैं, जो भगवान विष्णु के साथ धरती पर अवतरित हुए थे। 

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