सीहोर में विशेष जज संजय कुमार शाही ने बीएन गोल्ड रियल एस्टेट एंड अलाइड लिमिटेड एवं बीएनजी ग्लोबल इंडिया लिमिटेड कंपनी के मालिक/संचालक/मैनेजर के बैंक खातों में जमा करोड़ों रुपये की राशि एवं विभिन्न प्रदेशों में स्थित करोड़ों रुपये की संपत्ति को कुर्क करने के कलेक्टर प्रवीण सिंह के अंतरिम आदेश को स्थायी कर दिया है। स्पेशल जज संजय शाही ने चिटफंड मामले के लंबित अपराध में निर्णय पारित करते हुए स्थायी आदेश जारी किया। शासन की ओर से पैरवी सहायक जिला अभियोजन अधिकारी प्रमोद अहिरवार ने की।
मीडिया सेल प्रभारी केदार कौरव ने बताया कि बीएन गोल्ड रियल एस्टेट एंड अलाइड लिमिटेड एवं बीएनजी ग्लोबल इंडिया लिमिटेड कंपनी के विरूद्ध परिवादी हसनाबाद निवासी द्वारका प्रसाद वर्मा एवं अन्य निवेशकों की रिपोर्ट पर थाना कोतवाली में अपराध क्रमांक-150/2016 धारा-420, 294, 34 भारतीय दण्ड विधान इजाफा धारा-6 मध्यप्रदेश के निक्षेपकों के हितों का संरक्षण अधिनियम 2000 के तहत अपराध दर्ज किया गया था। निवेशकों का कहना है कि बीएन गोल्ड रियल एस्टेट एंड अलाइड लिमिटेड एवं बीएनजी ग्लोबल इंडिया लिमिटेड कंपनी के डायरेक्टर की हैसियत से इन लोगों ने करोड़ों रुपये का निवेश करवाया। एक निश्चित समय में राशि को दोगुना करने का दावा किया और फिर निवेशकों की राशि नहीं लौटाई।
अनुसंधान के पश्चात न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया। उस पर सुनवाई करते हुए आरोपियों को नौ नवंबर 2022 को दोषसिद्धि पाते हुए सभी 20 मामलों में मिलाकर 220 साल का सश्रम कारावास सुनाया था। साथ ही सभी आरोपियों पर 24.26 करोड़ रुपये का अर्थदंड लगाया था। अर्थदण्ड की राशि से न्यायालय ने निवेशकों को उनकी रकम लौटाने का आदेश किया था। थाना कोतवाली ने चिटफंड अधिनियम के अंतर्गत आरोपियों के आठ खातों में जमा करोड़ों की राशि एवं आरोपियों द्वारा निवेशकों की राशि से मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों एवं अन्य प्रदेशों में खरीदी करोड़ों-अरबों की 22 संपतियों को कुर्क करने के लिए तत्कालीन जिला दण्डाधिकारी को मामला भेजा था।
जिला समिति कर रही मामले की समीक्षा
चिटफंड संबंधित मामलों में शासन स्तर पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देश पर लोक अभियोजन संचालनालय के संचालक राजेश चावला, कलेक्टर प्रवीण सिंह, पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी एवं जिला अभियोजन अधिकारी अनिल बादल की जिला स्तरीय समिति समय-समय पर पुलिस कन्ट्रोल रूम में अभियोजन अधिकारियों के साथ बैठक करती है। चिटफंड मामले की निरंतर समीक्षा की जा रही है। ताकि निवेशकों को उनकी मेहनत की कमाई का पैसा वापस मिल सकें।