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सीहोर: मरीह माता मंदिर में नवरात्रि के अवसर पर किए जा रहे अनुष्ठान, 150 सालों से चली आ रही परंपरा 

Mon, 04 Apr 2022 12:58 PM IST
अंकिता विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर

सार

सीहोर के विश्राम घाट में स्थापित मरीह माता मंदिर में नवरात्रि के दिनों में विशेष पूजा अनुष्ठान किए जा रहे हैं। नवमी के अवसर पर मंदिर में विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। भंडारे की परंपरा करीब 150 सालों से चली आ रहा है।
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मरही माता मंदिर में कन्याओं को भेंट की गई चुनरी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सीहोर जिले के विश्राम घाट में माता चौसट योगिनी मरीह माता मंदिर में नौ दिवसीय दिव्य यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। मंदिर में नवरात्रि के दिनों में हर साल इस तरह का आयोजन किया जाता है। जानकारों के मुताबिक करीब 150 सालों से मरही माता मंदिर में नवरात्रि के दिनों में भंडारे का आयोजन भी किया जाता है। बीते सालों की तरह इस साल भी 10 अप्रैल को मंदिर में भंडारे का आयोजन किया जाएगा। इससे पहले दुर्गा अष्टमी के दिन रात के 12 बजे निशा आरती की जाएगी। रविवार को श्रद्धालुओं ने मंदिर में कन्याओं का पूजन किया और उनको चुनरी अर्पित।
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ज्योतिषाचार्य पंडित गणेश शर्मा ने बताया कि मां दुर्गा के नौ स्वरूपों में मां ब्रह्मचारिणी द्वितीय स्वरूप हैं। ब्रह्मचारिणी अर्थात् तप का आचरण करने वाली। इन्होंने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तप किया था, इसलिए ये ब्रह्मचारिणी कहलाई। मां ब्रह्मचारिणी का स्वरुप अत्यंत ज्योतिर्मय है। इनके बांए हाथ में कमंडल सुशोभित है तो दाहिने हाथ में ये माला धारण करती हैं। इनकी उपासना से साधक को सदाचार, संयम की प्राप्ति होती है। शहर के विश्राम घाट में मां चौसट योगिनी मरीह माता मंदिर में जारी नौ दिवसीय दिव्य यज्ञ में पंडित उमेश शर्मा और ज्योतिषाचार्य पंडित शर्मा के मार्ग दर्शन में मंदिर के व्यवस्थापक गोविन्द सिंह मेवा सहित अन्य श्रद्धालुओं ने देवी के मंत्रों के साथ आहुतियां दी।

यज्ञ के दौरान पंडित शर्मा ने बताया कि दिव्य यज्ञ का आयोजन क्षेत्र की सुख-समृद्धि के लिए किया जा रहा है। नौ देवियों के साथ हर रोज दस महाविद्याओं का भी आह्वान किया जाता है। उन्होंने बताया कि काली, तारा, त्रिपुरसुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुरभैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला शामिल है। प्रवृति के अनुसार दस महाविद्या के तीन समूह हैं। पहला सौम्य कोटि (त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, मातंगी, कमला), दूसरा उग्र कोटि (काली, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, तीसरा सौम्य-उग्र कोटि (तारा और त्रिपुर भैरवी)। मंदिर में पूजा अर्चना का क्रम जारी है। हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर में देवी के दर्शनों के लिए पहुंच रहे हैं। 
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