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Ravana Dahan Satna: सतना की कोठी में नहीं होता रावण दहन, लोग करते हैं पूजा, जानें क्या है इस परंपरा का कारण

Fri, 11 Oct 2024 07:55 PM IST
अरविंद कुमार न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, सतना

सार

Ravana Dahan Satna: सतना की कोठी में नहीं होता रावण दहन, लोग करते हैं पूजा, जानें क्या है इस परंपरा का कारण
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सतना की कोठी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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विजयदशमी के त्योहार को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन देश भर में लोग लंका पति रावण का पुतला दहन कर भगवान राम की जीत का जश्न मनाते हैं। लेकिन देश में कुछ ऐसे इलाके भी हैं, जहां दशहरे के दिन रावण की पूजा की जाती है। रावण को पूजने वाले इलाकों के नामों सूची में एक नाम सतना जिले के कोठी कस्बे का भी है।

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बता दें कि यहां रावण की एक प्रतिमा थाना परिसर के भीतर स्थापित है और हर साल दशहरे पर ग्रामीण उसकी पूजा करते हैं। कोठी निवासी मिश्रा परिवार पिछले 45 साल से रावण की पूजा करता आ रहा है। यहां लोग रावण की पूजा और जय जयकार करते हैं।

दशानन के बताते हैं वंशज
दरअसल, यहां के लोग रावण को अपना रिश्तेदार मानते हैं और उसे महाज्ञानी के रूप में सम्मानित करते हैं। रावण की पूजा करने वाले मिश्रा परिवार के सदस्य रमेश मिश्रा बतलाते हैं कि वे सभी दशानन के वंशज हैं। इसीलिए वे रावण की पूजा करते हैं।
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आने वाली पीढ़ी भी परंपरा को रखेगी बरकरार
गांव के अन्य लोग भी इस पूजा में शामिल होते हैं। उनका मानना है कि रावण सबसे ज्ञानी था, जिसने ब्रह्मा, विष्णु और महेश को प्रसन्न किया। यद्यपि रावण में अहंकार था, उसकी भक्ति, तप और ज्ञान की सराहना की जाती है। रमेश मिश्रा का कहना है कि वे वर्षों से दशहरे के दिन रावण की प्रतिमा की पूजा बड़े धूमधाम से करते आ रहे हैं और इनकी आगे आने वाली पीढ़ी भी इस परंपरा को बरकरार रखेगी।

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थाना परिसर में मौजूद रावण प्रतिमा - फोटो : अमर उजाला

एक तरफ रावण के पुतले को जलाते हैं, वहीं दूसरी ओर होती है पूजा
जहां विजयादशमी के अवसर पर सभी रावण के पुतले को जला दशहरा मनाते हैं। वहां सतना जिले के अंतर्गत आने वाला यह कोठी कस्बा रावण को पूज अपने साथ कई रहस्यों को जन्म दे रहा है। यहां के लोग खुद को रावण का वंशज बताते हैं। इनके दावों पर कितनी सच्चाई है, यह पता कर पाना तो मुश्किल है। परंतु यह जरूर कह सकते हैं कि यह आस्था का प्रतीक है और अपने आप में एक कभी न सुलझ पाने वाला रहस्य भी।

प्रतिमा तोड़ने का किया प्रयास तो निकला सांप
पुजारी रमेश मिश्रा ने एक किस्सा सुनाते हुए बताया कि जब 15 साल पहले नए थाना भवन के निर्माण के दौरान उन्हें स्वप्न में किसी द्वारा प्रतिमा को तोड़ने का संकेत मिला। जब वे सुबह पहुंचे तो जेसीबी ने रावण की प्रतिमा पर प्रहार किया, जिसके परिणाम स्वरूप एक सांप बाहर निकला। इस घटना ने मजदूरों के बीच भगदड़ मचाई और अंततः निर्माण स्थल बदल दिया गया।

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