राजगढ़ जिले में इन दिनों सेल्यूलाइटिस नाम का खतरनाक बैक्टीरियल इंफेक्शन तेजी से पांव पसार रहा है। जिला अस्पताल में अब तक 40 से ज्यादा मरीज सामने आ चुके हैं। हालात इतने गंभीर हैं कि ब्यावरा के एक मरीज को अपना पूरा पंजा तक गंवाना पड़ा है। रोजाना एक से दो नए मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य विभाग में भी हड़कंप मचा हुआ है।
जिला अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक सिलोदिया ने बताया कि सेल्यूलाइटिस त्वचा और उसके नीचे के ऊतकों में होने वाला बैक्टीरियल संक्रमण है। इसकी शुरुआत अक्सर मामूली चोट, कट लगने, खरोंच, खुजली या सूजन से होती है। बैक्टीरिया इसी छोटे से घाव से शरीर में घुस जाता है। शुरुआत में लालपन और दर्द होता है, जिसे लोग नजरअंदाज कर देते हैं और फिर यही लापरवाही भारी पड़ जाती है।
ब्यावरा निवासी 51 वर्षीय मनोज पालीवाल के पैर में गिट्टी चुभ गई थी। परिवार ने इसे मामूली समझा, लेकिन कुछ ही दिनों में पैर में सूजन बढ़ गई और मवाद आने लगा। धीरे-धीरे पैर का रंग लाल से नीला और फिर काला-हरा हो गया। जब जिला अस्पताल लाया गया तब तक संक्रमण पूरे पंजे में फैल चुका था। जान बचाने के लिए डॉक्टरों को उनका पंजा काटना पड़ा।
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मोर पीपली की 50 वर्षीय इंदु सिंह का हाथ 8 दिन पहले दीवार से टकरा गया था। कोहनी के नीचे सूजन और लालपन आया। जांच में सेल्यूलाइटिस निकला। चीरा लगाने पर अंदर से बदबूदार पानी निकला। इसी तरह शेलापानी के देवकरण वर्मा फिसल कर गिरे थे, उनका हाथ सड़ गया और खराब त्वचा निकालनी पड़ी। पाटक्या के 70 वर्षीय डूंगर सिंह बाथरूम में गिरे थे, उनका पैर काला-नीला पड़ गया। मालीपुर के 65 वर्षीय करण सिंह को खुजली करने से घाव बना और संक्रमण फैल गया।
डॉ. सिलोदिया ने बताया कि डायबिटीज, बीपी और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में यह संक्रमण बहुत तेजी से फैलता है। इसमें एंटीबायोटिक, इंजेक्शन और रोज ड्रेसिंग करनी पड़ती है। जहां ऊतक खराब हो जाते हैं, वहां सर्जरी कर उसे निकालना पड़ता है। समय पर CBC, CRP जांच और इलाज बेहद जरूरी है। डॉक्टरों ने अपील की है कि किसी भी चोट पर लालपन, सूजन और तेज दर्द को हल्के में न लें और तुरंत अस्पताल पहुंचें।