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MP News: जिला अस्पताल में 22 मासूमों की मौत से हड़कंप! बीते एक महीने से लगातार जा रही बच्चों की जान

Fri, 31 Jul 2026 07:41 AM IST
पन्ना ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पन्ना

सार

पन्ना जिला अस्पताल की एसएनसीयू में पिछले एक महीने में 22 नवजात और छोटे बच्चों की मौत से स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर सवाल उठे हैं। सीएमएचओ ने वार्ड का निरीक्षण कर जांच शुरू कराई। विभाग का कहना है कि अधिकांश बच्चे गंभीर हालत में रेफर होकर आए थे। मौतों के कारणों की विस्तृत समीक्षा जारी है।
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पन्ना जिला अस्पताल में 22 बच्चों की मौत से हड़कंप मच गया है। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पन्ना जिला अस्पताल एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। यहां नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई यानी एसएनसीयू में पिछले एक महीने के दौरान जन्म से लेकर एक वर्ष तक की उम्र के 22 मासूम बच्चों की मौत ने हड़कंप मचा दिया है।
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लगातार हो रही इन मौतों के बाद अस्पताल की व्यवस्थाओं, इलाज की गुणवत्ता और जिम्मेदारी को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी स्वयं जिला अस्पताल पहुंचे और एसएनसीयू वार्ड का निरीक्षण किया। 
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पन्ना जिला चिकित्सालय की एसएनसीयू यूनिट, जहां गंभीर रूप से बीमार नवजात और छोटे बच्चों का इलाज किया जाता है, इन दिनों चर्चा का केंद्र बनी हुई है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार पिछले एक माह में यहां 22 बच्चों की मौत हुई है। यह संख्या सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। लगातार हो रही मौतों ने परिजनों की चिंता भी बढ़ा दी है।

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सीएमएचओ खुद पहुंचे 
स्थिति का जायजा लेने के लिए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी राजेश प्रसाद तिवारी जिला अस्पताल पहुंचे। उन्होंने एसएनसीयू वार्ड का निरीक्षण किया और डॉक्टरों व स्टाफ से उपचार व्यवस्था, उपलब्ध संसाधनों, दवाइयों, उपकरणों तथा स्टाफ की स्थिति की जानकारी ली। साथ ही सभी मामलों की समीक्षा कर आवश्यक निर्देश भी दिए।
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स्वास्थ्य विभाग की अलग दलील
सीएमएचओ राजेश प्रसाद तिवारी  का कहना है कि एसएनसीयू में भर्ती होने वाले अधिकांश बच्चे गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के साथ रेफर होकर आते हैं। सभी मामलों की जांच की जा रही है और प्रत्येक मौत के कारणों की विस्तृत समीक्षा के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। वहीं दूसरी ओर परिजनों का कहना है कि अस्पताल में बेहतर इलाज और पर्याप्त सुविधाएं सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। 

वो सवाल जिनके जवाब का हर किसी को इंतजार
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर एक महीने में 22 मासूमों की मौत के पीछे वास्तविक कारण क्या हैं? क्या सभी मौतें केवल गंभीर चिकित्सकीय स्थितियों के कारण हुईं या फिर अस्पताल की व्यवस्थाओं में भी कहीं कोई कमी रही? इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएंगे। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग ने पूरे मामले की समीक्षा शुरू कर दी है और जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। 
 

 

सीएमएचओ ने जिला अस्पताल पहुंचकर जायजा लिया।

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