मध्य प्रदेश में कोरोना के केस में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने केंद्र सरकार के दिशानिर्देशों का पालन करते हुए गुरुवार रात से नाइट कर्फ्यू लागू कर दिया है। राज्य के सभी शहरों में रात 11 बजे से सुबह 5 बजे तक नाइट कर्फ्यू रहेगा।
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक शुक्रवार को 32 नए केस सामने आए हैं। इसमें इंदौर में सबसे ज्यादा 13 केस सामने आए, जबकि भोपाल में 7 नए केस मिले हैं। शेष केस अन्य जिलों में आए हैं। इस दौरान एक मौत भी रिपोर्ट हुई है। इन्हें मिलाकर अब प्रदेश में एक्टिव केस की संख्या 209 तक पहुंच गई है। कई महीनों बाद ऐसी स्थिति बनी है कि मध्य प्रदेश में कोरोना के एक्टिव केस का आंकड़ा 200 के पार पहुंचा है।
राज्य सरकार ने जारी की सख्त गाइडलाइन
केंद्र सरकार ने ओमिक्रॉन वैरिएंट के बढ़ते खतरे को देखते हुए राज्यों को नाइट कर्फ्यू और लॉकडाउन की तैयारी के निर्देश दिए थे। इसका पालन करते हुए मध्य प्रदेश नाइट कर्फ्यू लागू करने वाला पहला राज्य बन गया है। राज्य सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक वैक्सीन के दोनों डोज नहीं लगवाने वाले 18 साल से ऊपर के लोगों को सिनेमा हॉल, मल्टीप्लेक्स, थिएटर, जिम, कोचिंग क्लासेस, स्वीमिंग पूल, क्लब, स्टेडियम में एंट्री नहीं मिलेगी। सरकारी कर्मचारियों को दोनों डोज अनिवार्य कर दिए गए हैं। उन्हें ड्यूटी पर भी आना होगा। मॉल-मार्केट आने-जाने पर पाबंदी नहीं है, लेकिन दुकानदार दोनों डोज लगवाने वाले ग्राहकों को ही सामान देंगे। राज्य सरकार ने 17 नवंबर को प्रदेश में नाइट कर्फ्यू हटाया था। इसे करीब 36 दिन बाद फिर से लागू कर दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने यह बताई थी नाइट कर्फ्यू लगाने की वजह
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जनता के नाम जारी संदेश में कहा कि मध्य प्रदेश में कई महीनों बाद (गुरुवार को) कोरोना के 30 नए प्रकरण मिले हैं। पूरे देश में 7,495 पॉजिटिव केस आए हैं। महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली में एक सप्ताह से पॉजिटिव केस में लगातार वृद्धि हो रही है। महाराष्ट्र में 1201, गुजरात में 91 और दिल्ली में 125 नए प्रकरण सामने आए हैं। हम सब जानते है कि इन राज्यों से मध्य प्रदेश में आना-जाना लगातार बना रहता है। पूर्व के अनुभव बताते हैं कि महाराष्ट्र में केस बढ़ने लगे, फिर गुजरात में बढ़े। उसके बाद मध्य प्रदेश में लगातार केस बढ़े। पहली लहर और दूसरी लहर में ऐसा ही हुआ। दूसरी लहर में जो कष्ट हमने झेले हैं, उसे हम नहीं भूल सकते। दोनों लहरों की शुरुआत इंदौर-भोपाल से ही हुई। इंदौर-भोपाल में साप्ताहिक प्रकरण नवंबर के मुकाबले दिसंबर में लगभग तीन गुना हो गए हैं।