बैठक में निर्देश देते कलेक्टर।
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भारत के राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के अनुसार इंदौर जिले में जन्म के समय लिंगानुपात जो 2015-16 में 849 था, वह 2019-21 में बढ़कर 996 हो गया है। जन्म के समय लिंगानुपात पर इंदौर जिले ने 147 अंकों की छलांग लगाई है।
दरअसल कलेक्टर मनीष सिंह की अध्यक्षता में पीसीपीएनडीटी सलाहकार समिति की बैठक आयोजित की गई। कलेक्टर ने सलाहकार समिति के सभी सदस्यों को नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 में जिले में हुए जन्म के समय लिंगानुपात के आंकड़ों में सुधार लाने के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि भारत के राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के अनुसार इंदौर जिले में जन्म के समय लिंगानुपात जो 2015-16 में 849 था, वह 2019-21 में बढ़कर 996 हो गया है। जन्म के समय लिंगानुपात पर इंदौर जिले ने जो 147 अंकों की छलांग लगाई है उसमें सलाहकार समिति के सदस्यों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
कलेक्टर ने पीसीपीएनटीडी एक्ट के जमीनी स्तर पर बेहतर एवं प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एसडीएम लेवल पर एक्ट की मॉनिटरिंग हेतु समिति गठित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिले में केमिस्ट शॉप पर बिना प्रिस्क्रिप्शन एवं योग्य चिकित्सक द्वारा परामर्श के एमटीपी पिल्स के विक्रय पर रोक लगाने के लिए जल्द ही आदेश पारित किए जाएंगे। जो भी सोनोग्राफी सेंटर पीसीपीएनडीटी एक्ट के नियमों का उल्लंघन करता है उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जिले में चलाएंगे जागरूकता अभियान
हमें आगे आने वाले समय में ना केवल जन्म के समय लिंगानुपात को बेहतर करना है बल्कि शिशु लिंगानुपात में भी अनुरूप सुधार लाना है। इसके लिए जिले में जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। बैठक में सर्व सहमति से निर्णय लिया गया कि जिले में अवैध मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी रोकने के लिए जिले के स्कूल एवं कॉलेजों में जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। जहां समिति सदस्यों द्वारा युवक एवं युवतियों को अवैध मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी के दुष्प्रभावों के बारे में अवगत कराया जाएगा।
बैठक में समिति के सदस्यों ने जिले में पिछले तीन दशकों में पीसीपीएनडीटी एक्ट के क्रियान्वयन एवं उसके परिणामों के संबंध में पीपीटी प्रजेंटेशन दिया। बताया कि जिले में प्रसव पूर्व लिंग जांच को रोकने के लिए सोनोग्राफी केन्द्रों की पुन: मैपिंग करवाई जा रही है। गर्भवती महिलाओं के पहचान पत्र भी अनिवार्य कर दिए गए हैं। सलाहकार समिति द्वारा भी इस संबंध में नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है।