मध्यप्रदेश के दमोह में हिजाब और धर्मांतरण मामले से चर्चा में आए गंगा जमुना स्कूल का अवैध अतिक्रमण नगर पालिका ने मंगलवार की देर रात तक हटा दिया। वहीं, गंगा जमुना स्कूल के कई बच्चे सड़क पर उतर आए और एक रैली निकालकर उन्होंने स्कूल चालू करने की मांग की। इस दौरान पुलिस की भी बड़ी संख्या में मौजूदगी रही।
छात्राओं को हिजाब पहनाने और धर्मांतरण से चर्चा में आया स्कूल
दरअसल, हिंदू छात्राओं को हिजाब पहनाने के मामले में गंगा जमुना स्कूल की जांच शुरू हुई थी। उसके बाद धर्मांतरण और बच्चों को जबरदस्ती नमाज पढ़ाने जैसे मामले का भी खुलासा हुआ था। शासन के निर्देश पर इस मामले की जांच की गई और स्कूल की मान्यता निलंबित कर दी गई। साथ ही स्कूल के 11 प्रबंधकों पर मामला दर्ज किया गया। वहीं, तीनों आरोपियों को जेल भेज दिया गया है, जबकि मुख्य आरोपी अभी फरार है।
अतिक्रमण हटाने पहुंचा प्रशासनिक अमला
वहीं, स्कूल द्वारा अवैध अतिक्रमण करने की सूचना मिलने पर नगर पालिका ने नोटिस जारी किया था। मंगलवार की शाम नोटिस की समय अवधि खत्म होने के बाद पूरा प्रशासनिक अमला नगरपालिका कर्मचारियों के साथ स्कूल पहुंचा। फिर गेट पर लगा ताला तोड़ने के बाद अंदर पहुंचकर पहले तल पर चल रहे निर्माण कार्य में लगाई गई सेंटिंग को तोड़ा गया।
बच्चों ने स्कूल चालू करने की मांग को लेकर निकाली रैली
मंगलवार की रात करीब नौ बजे तक यह अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई चलती रही। उसके बाद इस कार्रवाई को रोक दिया गया। फिर बुधवार को कार्रवाई शुरू करने की बात नगर पालिका सीएमओ के द्वारा कही गई। जिस दौरान यह कार्रवाई चल रही थी, उसी समय कई स्कूली बच्चे अपने परिजनों के साथ गंगा जमुना स्कूल के सामने से होते हुए गुजरे और स्कूल चालू करने के नारे लगाए। यह रैली शहर के अन्य मार्गों से होते हुए पठानी मोहल्ला पहुंची, जहां यह रैली खत्म हुई।
निरस्त हो सकती है स्कूल की मान्यता
बता दें कि बुधवार यानी आज या संभवत: गुरुवार को स्कूल की मान्यता भी निरस्त हो सकती है, क्योंकि इसकी तैयारियां सागर संयुक्त निदेशक के द्वारा शुरू कर दी गई हैं। जैसे ही वरिष्ठ अधिकारियों का निर्देश मिलेगा, वैसे ही स्कूल की मान्यता भी निरस्त कर दी जाएगी। 20 जून से स्कूलों का संचालन शुरू हो रहा है।
स्कूल के विद्यार्थियों का भविष्य अधर में लटका!
इस बीच अगर गंगा जमुना स्कूल की मान्यता निरस्त होती है तो 1200 से अधिक बच्चों का भविष्य अधर में लटक जाएगा, क्योंकि अभी तक यह तय नहीं हो पाया कि अब बच्चे इसी स्कूल में पढ़ेंगे या किसी अन्य स्कूल में जाएंगे। हालांकि कई अभिभावक अपनी फीस वापस कराने और टीसी निकलवाने के लिए स्कूल पहुंच रहे हैं। लेकिन वहां पर स्कूल प्रबंधन का कोई भी सदस्य मौजूद नहीं है, जिस कारण बच्चों की टीसी भी नहीं मिल पा रही है। हालांकि दो से तीन दिनों के अंदर प्रशासन इस मामले में निर्णय ले लेगा कि इन बच्चों का भविष्य आगे क्या होगा और किस स्कूल में इनके लिए सीटें आरक्षित कराई जाएंगी।