फेसबुक लोगों को जोड़ता है, बिछड़े हुओं को मिलाता है और जवां दिलों को करीब लाता है। लेकिन हाल ही में लोगों ने फेसबुक पर एक नया प्रयोग भी शुरु किया है और इस प्रयोग के बाद फेसबुक दंगे करा रहा है।
सांप्रदायिक रंग में रंगे फेसबुक पेज और अकाऊंट माहौल बिगड़ने में कोई कमी नहीं छोड़ रहे हैं। देश भर से ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं जहां फेसबुक की मदद से सांप्रदायिकता को बढ़ावा दिया जा रहा है।
बरेली से लेकर बिलासपुर तक और खंडवा से लेकर दिल्ली तक से ऐसी घटनाए सामने आ रही हैं और इस ज़हर से कैसे निबटा जाए, इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं हैं।
एमपी के खंडवा में बिगड़ा माहौल
खंडवा मुन्सीपल कॉरपोरेशन के चेयरमैन अमर यादव के फर्जी फेसबुक अकाऊंट से कुछ ऐसा पोस्ट किया गया जिसे पढ़ कर लोग सड़क पर उतर आए और एक शख्स को अपनी जान भी गंवानी पड़ी।
मामला बुधवार का है जब खंडवा की फिज़ाओं में तैरती अफवाहें खूनी हो गईं और फिर वो खून सड़कों पर फैलने लगा। अंग्रेजी अखबार TOI के मुताबिक जब भीड़ सड़कों पर आई तो ईमलीपुरा और कहरवाड़ी के दुकानदारों ने अपने शटर गिरा दिए।
हातमपुरा और खांशवाली इलाके में हुई हिंसा में दो लोग घायल भी हो गए। एसपी खंडवा मनोज शर्मा ने एक मौत की पुष्टि की है।
आखिर कब तक?
फेसबुक पर एक पोस्ट शहर का माहौल खराब कर देती है, लोग पुलिस के पास जाने की बजाय कानून अपने हाथ में लेना ज्यादा ठीक समझते हैं, आखिर हमारे देश में हो क्या रहा है?
सवाल ये भी है कि क्या सोशल साइटों पर फैल रहे जहर के इस जाल को सरकार काट पाएगी? और सवाल ये भी है कि कब तक हम इतने कमजोर रहेंगे कि कोई फेसबुक पोस्ट हमारी भावनाएं आहत करती रहे?
सवाल कई हैं लेकिन जवाब किसी के भी पास नहीं ऐसे में आखिर ये सवाल हमें खुद से पूछना चाहिए कि आखिर ये उन्माद कब तक?