मौका ईद का था, सभी एक दूसरे से गले मिल रहे थे और ईद की मुबारकबाद दे रहे थे। इसी सब के बीच एक मुस्लिम बच्चे ने एमपी के सीएम शिवराज सिंह चौहान को मुस्लिम टोपी पहनानी चाही, लेकिन शिवराज ने टोपी उसी बच्चे के सिर पर रख दी।
एक दृश्य भी टीवी पर दिखाई दिया जब उन्हें एक टोपी भेंट की गई तो उन्होंने इसे अपने सुरक्षाकर्मी को दे दिया।
सीधे शब्दों में कहा जाए तो उन्होंने इस ईद पर मुस्लिम टोपी पहनने से परहेज किया। पिछले साल उन्होंने टोपी पहनी थी और इस बात की काफी तारीफ भी हुई थी।
टोपी की सियासत
इस बार उन्होंने टोपी नहीं पहनी, आपको याद ही होगा कि इससे पहले मुस्लिम टोपी पहनने से इंकार किया था नरेंद्र मोदी ने।
टोपी की सियासत यूं तो काफी पुरानी है लेकिन समय समय पर नेता इसे अपनी तरह से इस्तेमाल कर लेते हैं। मोदी के पीछे टोपी विवाद का भूत लगा था, तमाम लोग इसकी आलोचना कर रहे थे लेकिन उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ा।
शिवराज ने टोपी पहनी तो कहा गया कि शिवराज बीजेपी का सेकुलर चेहरा हैं, कहा तो यहां तक गया कि अगर मोदी के नाम पर सहमति नहीं बनी तो शिवराज को आगे किया जा सकता है।
लेकिन अब शिवराज ने भी टोपी पहनने से इंकार कर दिया। अब क्या माना जाए कि वो भी हिंदुत्व की राजनीति करेंगे? क्या माना जाए कि वो भी मोदी के रास्ते पर चलेंगे?
सेकुलर नहीं रहे शिवराज?
पिछले साल जब शिवराज ने टोपी पहनी थी तो अभिनेता रजा मुराद ने भी काफी तारीफ की थी और कहा था कि,"मोदी को भी शिवराज से ये सीखना चाहिए और मुस्लिम टोपी से नफरत नहीं करनी चाहिए।"
ईद के मौके पर रजा मुराद, कांग्रेस नेता सुरेश पचौरी, आलोक संजर आदि मंच पर बैठे थे लेकिन किसी ने भी मुस्लिम टोपी नहीं पहनी थी। सीएम से इस बाबत एक पत्रकार ने सवाल किया तो उन्होंने कहा कि,"यह किस तरह का सवाल है?"
उन्होंने कहा कि उन्होंने ईद की शुभकामनाएं दी हैं और ये भाईचारे का त्यौहार है।
कांग्रेस नेता सत्यदेव कटारे ने कहा कि,"पिछले साल ये टोपी पहनना इलेक्शन स्टंट था क्योंकि अगले तीन महीने में चुनाव होने थे। अब चुनाव हो गए हैं तो वो टोपी पहनने की बजाय टोपी पहना रहे हैं।"