छिंदवाड़ा में भाजपा ने चार निकायों पर कब्जा जमा लिया है, जबकि कांग्रेस यहां सिर्फ दो निकायों पर ही अपनी सत्ता बचा सकी। पूर्व सीएम कमलनाथ के गढ़ में भाजपा ने निकाय चुनाव में कांग्रेस को करारी शिकस्त दी है।
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छह में से चार निकाय पर भाजपा का कब्जा
- फोटो : सोशल मीडिया
मध्यप्रदेश के 18 जिलों की 46 नगरीय निकायों (17 नगर पालिका और 29 नगर परिषद) के चुनाव की मतगणना सुबह 9 बजे से जारी है। छिंदवाड़ा में भाजपा ने चार निकायों पर कब्जा जमा लिया है, जबकि कांग्रेस यहां सिर्फ दो निकायों पर ही अपनी सत्ता बचा सकी। पूर्व सीएम कमलनाथ के गढ़ में भाजपा ने निकाय चुनाव में कांग्रेस को करारी शिकस्त दी है। रोमांचक मुकाबले में सौसर नगर पालिका परिषद में भाजपा ने एकतरफा जीत हासिल करते हुए कांग्रेस का सूपड़ा साफ कर दिया है। कांग्रेस इस परिषद में एक भी पार्षद जिताने में कामयाब नहीं रही।
पूर्व सीएम कमलनाथ, सांसद नकुल नाथ के लगातार चुनावी सभाओं के बाद भी कांग्रेस यहां हार गई। जिला पंचायत उपाध्यक्ष अमित सक्सेना को चुनाव की जवाबदारी दी गई थी, इन सब के बावजूद कांग्रेस को यहां शर्मनाक हार का सामना करना। इसी तरह विधायक सुनील उईके का गढ़ कहे जाने वाले जुन्नारदेव और दमुआ में कांग्रेस को पराजय का सामना करना पड़ा, जबकि मोहगांव में भी भाजपा अपना परचम लहराने में कामयाब रही।
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निकाय चुनाव में भाजपा और कांग्रेस में कड़ी टक्कर थी
- फोटो : अमर उजाला
हर्रई नगर परिषद में कांग्रेस का कब्जा
जिले के हर्रई और पांढुर्णा में कांग्रेस ने अच्छा प्रदर्शन किया। कांग्रेस ने परिषद के 15 वॉर्डों में से 13 पर कब्जा जमाया, एक पर निर्दलीय और एक में भाजपा पार्षद ने जीत हासिल की। इस परिणाम के बाद हर्रई नगर परिषद में कांग्रेस का कब्जा हो गया है। इससे पहले यहां भाजपा की परिषद थी, ऐसे में विकास कार्यों में जमकर कमीशन खोरी और अन्य मुद्दों को लेकर भाजपा को यहां एंटी इनकम्बेंसी का सामना करना पड़ा, जिसके कारण भाजपा को यहां बुरी तरह से पराजय का मुंह देखना पड़ा।
मोहगांव नगर परिषद में भाजपा ने मारी बाजी
नगर परिषद मोहगांव में भाजपा ने बाजी मार ली है। यहां हुए चुनाव में 15 वॉर्डों में से 9 पर भाजपा, 6 में कांग्रेस पार्षद ने अपनी जीत दर्ज की है। मोहगांव में पूर्व में कांग्रेस की परिषद थी। ऐसे में जनता ने इस बार भाजपा को चुना है।
सौसर में कांग्रेस का सूपड़ा साफ
नगर पालिका परिषद सौसर में कांग्रेस ने शर्मनाक प्रदर्शन किया है, यहां 15 में से 14 सीट पर भाजपा और एक पर निर्दलीय पार्षद प्रत्याशी ने चुनाव जीतकर कांग्रेस का सूपड़ा साफ कर दिया है। यहां का चुनाव काफी प्रतिष्ठा पूर्ण समझा जाता था। पूर्व सीएम कमलनाथ और सांसद नकुल नाथ ने कांग्रेस की परिषद बनाने के लिए आम सभा भी की थी। जबकि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी इस क्षेत्र में रोड शो कर जनता से आशीर्वाद मांगा था।
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कमलनाथ, सांसद नकुल नाथ के प्रचार के बाद भी हार गई कांग्रेस
- फोटो : अमर उजाला
भाजपा की बागी उषा भमोरे हारी
महिला मोर्चा की पूर्व अध्यक्ष उषा भमोरे को भाजपा से बगावत करना भारी पड़ गया। वह बुरी तरह से चुनाव हार गई। चुनाव पूर्व टिकट वितरण को लेकर उषा भमोरे ने भाजपा से बगावत कर अपना अध्यक्ष का निर्दलीय पर्चा दाखिल किया था, लेकिन उनकी यह युक्ति काम नहीं आई और उन्हें निराशाजनक हार का सामना करना पड़ा।
जुन्नारदेव में भाजपा जीती
आदिवासी अंचल जुन्नारदेव नगर पालिका में भाजपा ने कब्जा जमा लिया है। यहां हुए रोमांचक मुकाबले में भाजपा ने कुल 18 वॉर्ड में से 11 वॉर्डों में ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। वहीं, कांग्रेस छह और एक सीट निर्दलीय के खाते में गई है। यहां पूर्व में कांग्रेस की परिषद थी ऐसे में एंटी इनकंबेंसी फैक्टर भाजपा के लिए अच्छा साबित हुआ। जीत के बाद भाजपा में उत्साह का माहौल देखा जा रहा है वहीं कांग्रेस कार्यालय में सन्नाटा पसरा हुआ है।
दमुआ में भी भाजपा ने लहराया परचम
जुन्नारदेव की तरह दमुआ में भी भाजपा ने बाजी मार ली है। यहां कांग्रेस से नगरपालिका छीनकर भाजपा ने अपना परचम लहरा दिया है, हालांकि यहां कांग्रेस ने अच्छा प्रदर्शन किया लेकिन फिर भी भाजपा से पिछड़ गई। जादुई आंकड़े की बात करें तो भाजपा नौ कांग्रेस आठ और एक सीट पर निर्दलीय ने जीत दर्ज की है।
पांढुर्ना में कांग्रेसियों का जश्न
- फोटो : अमर उजाला
पांढुर्ना में 10 सीट पर सिमटी भाजपा
पांढुर्णा में कांग्रेस ने अच्छा प्रदर्शन किया और यहां 30 में से 17 सीटों पर कांग्रेस पार्षदों ने जीत हासिल की। जबकि भाजपा महज 10 सीट पर सिमट कर रह गई। हालांकि तीन सीट पर निर्दलीय पार्षदों ने कब्जा जमाने में कामयाबी हासिल की है। पिछले चुनाव में यहां निर्दलीय प्रत्याशी प्रवीण पालीवाल नगर पालिका अध्यक्ष चुने गए थे, जो पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सीताशरण शर्मा के रिश्तेदार थे। बाद में उन्होंने भाजपा ज्वाइन कर ली थी, लेकिन उनकी कार्यशैली से जनता में नाराजगी थी जिसका खामियाजा भाजपा को इस चुनाव में भुगतना पड़ा।
विधायक सुनील उइके के लिए खतरे की घंटी
जुन्नारदेव विधायक सुनील उईके निकाय चुनाव में कोई खास कमाल नहीं दिखा पाए। नगर पालिका परिषद दमुआ और जुन्नारदेव में कांग्रेस को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा, ऐसे में उनकी कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। क्योंकि दोनों ही जगह उन्हें कांग्रेस परिषद बनाने की जवाबदारी मिली थी। ऐसे में भी कार्यकर्ताओं में सामंजस्य नहीं बैठा पाए। टिकट वितरण को लेकर भी कई जगह असंतोष के स्वर उभरे थे। इसको लेकर भी विधायक की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। इस लिहाज से सुनील उईके के लिए इस हार को खतरे की घंटी माना जा रहा है।