मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग कार्यालय
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मध्य प्रदेश में पंचायत और नगरीय चुनावों की प्रक्रिया तेज हो गई है। खास बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश को ध्यान में रखते हुए अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षित सीटों का निर्धारण नए सिरे से किया जा रहा है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने शनिवार को नए आदेश जारी किए हैं। इसमें बताया गया है कि ओबीसी आरक्षण किस तरह दिया जाए।
नगरीय विकास एवं आवास विभाग की तरफ से शनिवार को नया आदेश जारी किया गया। इसके अनुसार जिन निकायों में अन्य पिछड़ा वर्ग की आरक्षित सीटों में कोई परिवर्तन नहीं है, वहां पर पूर्व में की गई कार्यवाही ही मान्य होगी। जिन निकायों में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए वर्तमान में आरक्षित वार्डों की संख्या में राज्य पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग की अनुशंसा अनुसार परिवर्तन (वृद्धि/ कमी) होना है, वहां SC और ST की आरक्षित सीटों को छोड़कर बाकी सीटों पर OBC का नए सिरे से आरक्षण किया जाएगा। शुक्रवार को विभाग की तरफ से जारी आदेश के अनुसार सिर्फ बढ़ने और कम होने वाली सीटों पर ही आरक्षण किया जाना था।
अब ऐसे होगा आरक्षण
विभाग के शुक्रवार को जारी आदेश के अनुसार किसी शहर में ओबीसी की आरक्षित 21 सीटें हैं और OBC आयोग की अनुशंसा के बाद 2 सीटे बढ़कर 23 हो गई हैं तो अनारक्षित सीटों में से सिर्फ दो सीटों के लिए आरक्षण की प्रक्रिया तय की जाएगी। नए आदेश के अनुसार उस शहर की कुल सीटों में से अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) की आरक्षित सीटों को छोड़कर बाकी सीटों के लिए दोबारा आरक्षण किया जाएगा।
ऐसे तय होगा आरक्षण
पिछड़ा वर्ग आयोग की अनुशंसा के अनुसार आरक्षण दिया जाएगा। इसके अनुसार यदि किसी निकाय में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति का आरक्षण मिलाकर 50% या उससे अधिक है तो अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का आरक्षण उस निकाय में शून्य होगा। यदि किसी निकाय में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति का आरक्षण मिलाकर 50% से कम है तो उस निकाय में अधिकतम 50% तक अन्य पिछड़ा वर्ग को आरक्षण होगा। यदि किसी निकाय में अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति का आरक्षण मिलाकर 50% से कम है तो वहां अन्य पिछड़ा वर्ग का आरक्षण उस निकाय की अन्य पिछड़ा वर्ग की आबादी से अधिक नहीं होगा। किसी भी निकाय में अन्य पिछड़ा वर्ग का आरक्षण 35% से अधिक नहीं होगा।
ऐसे समझे OBC आरक्षण को
किसी निकाय में 20 वार्ड है। इसमें से 50 प्रतिशत यानी 10 सीटों पर ही आरक्षण दिया जा सकेगा। अब यदि मान लें कि किसी निकाय में आबादी के अनुसार अनुसूचित जाति के लिए 2 सीट और अनुसूचित जनजाति के लिए 3 सीट आरक्षित है। ऐसे में यहां पर ओबीसी को अधिकतम 5 सीटें दी जा सकती हैं। संबंधित निकाय में पिछड़ा वर्ग की आबादी 20 प्रतिशत है तो कुल सीटों में 4 प्रतिशत यानी 4 सीटें ही ओबीसी के लिए आरक्षित होगी। लेकिन यदि SC-ST को किसी निकाय में आरक्षण नहीं है, तो भी OBC को 35% से ज्यादा आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा।