फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मध्य प्रदेश: मंदिरों में पुजारी नियुक्ति नीति पर कानूनी घेराबंदी, जबलपुर हाईकोर्ट ने सरकार को दिया आखिरी मौका

Sat, 01 Aug 2026 08:24 AM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर

सार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में सरकार नियंत्रित मंदिरों में पुजारियों की नियुक्ति नीति को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने राज्य सरकार को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का अंतिम अवसर देते हुए कहा कि इसके बाद मौका समाप्त मान लिया जाएगा।
विज्ञापन
जबलपुर हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

मध्य प्रदेश धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग द्वारा सरकार नियंत्रित मंदिरों में पुजारियों की नियुक्ति के लिए निर्धारित नीति को चुनौती देते हुए जबलपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि यह नीति एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के योग्य उम्मीदवारों के साथ भेदभाव करती है। हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने इस मामले में राज्य सरकार को जवाब पेश करने के लिए अंतिम अवसर प्रदान किया है।

युगलपीठ ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि चार सप्ताह के भीतर जवाब पेश नहीं किया जाता है, तो सरकार का अवसर समाप्त मान लिया जाएगा। अजाक्स, भोपाल के सचिव एम.सी. अहिरवार की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि राज्य सरकार के धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग के प्रमुख सचिव ने चार फरवरी 2019 को एक आदेश जारी किया था।

विज्ञापन


इसके माध्यम से सरकार द्वारा नियंत्रित मंदिरों में पुजारियों की नियुक्ति के लिए नीति निर्धारित की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया है कि इस नीति के तहत पुजारी पद पर नियुक्ति की प्रक्रिया में केवल ब्राह्मण समुदाय को प्राथमिकता दी जा रही है।

ये भी पढ़ें- Indore News: बारिश-नमी से बढ़ा संक्रमण, अस्पतालों में लगी मरीजों की लाइनें, पीने का पानी भी दूषित आ रहा

जाति के आधार पर वंचित करना संविधान का उल्लंघन

विज्ञापन

याचिका में कहा गया है कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों की अनदेखी की जा रही है। जाति के आधार पर अन्य वर्गों को पुजारी बनने के अवसर से वंचित करना उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है। याचिका में हाईकोर्ट से राज्य सरकार की पुजारी नियुक्ति व्यवस्था की समीक्षा करने की मांग की गई है।

याचिका की सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से जवाब पेश करने के लिए समय देने का आग्रह किया गया। इस पर युगलपीठ ने बार-बार समय मांगे जाने पर नाराजगी जताते हुए सरकार को अंतिम अवसर प्रदान किया।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें