मध्य प्रदेश में रतलाम जिले की आलोट विधानसभा सीट पर दिलचस्प मुकाबला है। कांग्रेस के पूर्व सांसद प्रेमचंद गुड्डू के निर्दलीय प्रत्याशी बनने से मुकाबला रोचक हो गया है। भाजपा ने पूर्व सांसद चिंतामण मालवीय को उम्मीदवार बनाया है। वहीं, कांग्रेस ने मनोज चावला को मैदान में उतारा जरूर है लेकिन मुख्य मुकाबला दो पूर्व सांसदों के बीच ही है।
आलोट विधानसभा सीट उज्जैन संसदीय क्षेत्र में आती है। अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित इस सीट पर 2018 में कांग्रेस के मनोज चावला ने भाजपा प्रत्याशी जितेन्द्र गेहलोत (थावरचंद गहलोत के पुत्र) को 5,448 मतों से परास्त किया था। इससे पहले 2013 में भाजपा के जितेन्द्र गहलोत, 2008 में भाजपा के ही मनोहर ऊंटवाल, 2003 में कांग्रेस के प्रेमचंद गुड्डू, 1998 में भाजपा के मनोहर ऊंटवाल, और 1980 से 1993 तक पूर्व केन्द्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत इस सीट को जीत चुके हैं। इस बार भाजपा ने पूर्व सांसद चिंतामण मालवीय पर दांव लगाया है। 2019 के लोकसभा चुनावों में मालवीय का टिकट कटा था और अब उन्हें विधानसभा चुनावों में उतारा गया है।
मालवीय का हुआ था विरोध
चिंतामण मालवीय को जब भाजपा ने प्रत्याशी घोषित किया, तब उनके नाम पर विरोध भी कम नहीं था। स्थानीय भाजपा नेता और कार्यकर्ता बाहरी प्रत्याशी थोपे जाने का विरोध कर रहे थे। सांसद नहीं थे तो मालवीय का संबंध भी इस इलाके से टूट गया था। दूसरी ओर, उज्जैन के सांसद रहे प्रेमचंद गुड्डू ने ऐसा नहीं किया। गुड्डू 2003 और 2008 में भाजपा की लहर के बावजूद यहां से विधायक बने। उसके बाद जब लोकसभा सदस्य बने तब भी आलोट से उनका संपर्क कायम रहा। इसका लाभ उन्हें मिल रहा है। कांग्रेस प्रत्याशी मनोज चावला के सामने गुड्डू बड़ी चुनौती साबित हो सकते हैं। गुड्डू की बेटी रीना बौरासी खुद इंदौर जिले की सांवेर सीट पर कांग्रेस की उम्मीदवार हैं।
मौजूदा विधायक का विरोध
2018 में सत्ता विरोधी लहर में कांग्रेस के मनोज चावला को जीत मिली थी। खटीक समाज से आने वाले मनोज चावला का पांच साल का कार्यकाल कुछ खास नहीं रहा। जब प्रेमचंद गुड्डू ने दावेदारी की और टिकट न मिलने पर इस सीट पर निर्दलीय नामांकन भरा, तब से ही माना जा रहा है कि चावला की पहली चुनौती भाजपा नहीं बल्कि कांग्रेस के बागी गुड्डू ही रहने वाले हैं।
यह है सीट का जातिगत समीकरण
आलोट विधानसभा सीट अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित है। इस क्षेत्र में कुल 2.22 लाख मतदाता हैं, जिनमें लगभग 90 हजार अनुसूचित जाति से ताल्लुक रखते हैं। लगभग 15 हजार ब्राह्मण, 20 हजार राजपूत, 20 हजार सौंधिया राजपूत, 20 हजार गुर्जर, 15 हजार मुस्लिम, 30 हजार बलाई समाज के मतदाता हैं।