भाजपा-कांग्रेस की सूची आने के बाद सतना में बगावत की बयार चल पड़ी है। टिकट कटने से नाराज दावेदारों ने बीएसपी का दामन थामा है। कांग्रेस पर ज्यादा असर पड़ा। नागौद के पूर्व विधायक का टिकट कटने से नाराज विधानसभा क्षेत्र के ब्लॉक कांग्रेस संगठन ने सोमवार को बसपा ज्वाइन कर लिया। तीन ब्लाक अध्यक्ष और मंडल सेक्टर पदाधिकारियों ने इस्तीफा दिया।
नागौद सीट से दावेदारी पेश कर रहे पूर्व विधायक यादवेंद्र सिंह का टिकट कटने के बाद समर्थकों में जमकर नाराजगी है। रविवार को यादवेंद्र के बीएसपी की सदस्यता लेने के बाद मंगलवार तक विधानसभा क्षेत्र में जमकर बगावती तेवर दिखे। सुबह पूर्व विधायक भोपाल से नागौद पहुंचे और शक्ति प्रदर्शन किया। इसके बाद से पलायन की आंधी शुरू हुई। सबसे पहले नगर पंचायत अध्यक्ष नागौद प्रतिभा सिंह ने कांग्रेस का दामन छोड़ बीएसपी की सदस्यता ग्रहण किया। वे यादवेंद्र की सगी बहू हैं।
वहीं, शाम तक विधानसभा का पूरा कांग्रेस संगठन ही बीएसपी के पाले में जा बैठा। तीनों ब्लॉक नागौद, उचेहरा और परसमनिया के अध्यक्ष ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया। 43 सेक्टर, 20 मंडलम सहित 278 बूथ प्रभारियों ने इस्तीफा दे दिया है। अब सिर्फ एक मंडलम अध्यक्ष कांग्रेस में बचे हैं।
नाराजगी की वजह
यादवेंद्र सिंह लंबे समय से कांग्रेस के साथ नागौद में खड़े रहे। साल 2013 में नागौद का किला भेदते हुए विधायक बने थे। साल 2018 में वे भाजपा विधायक नागेन्द्र सिंह से महज 1,213 मतों से हारे थे। ऐसे में उन्हें पूरी आशा थी कि उन्हें टिकट मिलेगा। उनकी मानें तो कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व भी आश्वासन देता रहा। ऐन समय पर पिछले चुनाव की निर्दलीय प्रत्याशी रश्मि सिंह को टिकट दे दिया गया। टिकट कटने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, दिग्विजय सिंह सहित सभी वरिष्ठ नेताओं से संपर्क की कोशिश करते रहे पर किसी ने फोन नहीं उठाया। लिहाजा इस अपमान से आहत होकर यह निर्णय लिया।
दिलीप मिश्रा जिलाध्यक्ष कांग्रेस ने जानकारी देते हुए बताया कि कोई ऐसी बगावत नहीं हुई है। हम लगातार सभी के संपर्क में हैं। बात हो रही है। कुछ लोगों को दबाव देकर कहलवाया जा रहा है। डैमेज कंट्रोल जारी है। जल्द ही स्थिति सुधर जाएगी। टिकट का निर्णय उच्च स्तर पर लिया जाता है। इस पर हम कुछ नहीं कह सकते हैं।