मध्य प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र जिस उम्मीद के साथ प्रारंभ हुआ था, वह पूरी तरह से टूट गई है। मंगलवार को सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। मध्य प्रदेश की 14वीं विधानसभा का यह आखिरी सत्र था, जो हंगामे की भेंट चढ़ गया। 25 जून से शुरू हुआ विधानसभा का मानसून सत्र कुल 5 दिनों तक चलना था, मगर यह 2 दिनों में महज 5 घंटे ही चल सका।
इस 5 घंटे की सदन की कार्यवाही के दौरान भी भारी हंगामा हुआ और 11,000 करोड़ का अनुपूरक बजट बिना चर्चा के मिनटों में ही पास हो गया। इसके विरोध में कांग्रेस तीन दिन से समानांतर विधानसभा चला रही है। इस दौरान कांग्रेस विधायक आंखों पर पट्टी बांधकर और कानों में हेडफोन लगाए अध्यक्ष की भूमिका निभा रहे हैं। कांग्रेस का कहना है कि इस समानांतर विधानसभा में सरकार के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा की जाएगी और उसके द्वारा किए गए घोटालों को उजागर किया जाएगा।
विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह का कहना है कि विधानसभा अध्यक्ष को न तो कुछ दिखता है और न ही वह कुछ बोलते हैं। वह बस नरोत्तम मिश्रा को ही देखते रहते हैं। उन्होंने कहा कि सदन अगर नहीं चल रहा है तो उसके दोषी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीताशरण शर्मा और नरोत्तम मिश्रा हैं।