न्यायालय अपर सत्र एवं जिला न्यायाधीश अमरपाटन
सात वर्षों तक चले कानूनी संघर्ष के बाद आखिरकार मैहर के खरवाही गांव में हुए बहुचर्चित हत्या कांड में पीड़ित परिवार को न्याय मिल गया है। 2018 में हुए इस जघन्य हत्याकांड में अमरपाटन न्यायालय के द्वितीय जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश प्रदीप कुमार दुबे ने सोमवार को फैसला सुनाते हुए दो आरोपियों स्वामिदीन कुशवाहा और रामकरण कुशवाहा को दोषी करार दिया। दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है और ₹4500 का अर्थदंड भी लगाया गया है।
मंदिर के पास हुआ था विवाद, गाड़ी में ले जाकर की थी हत्या
16 जनवरी 2018 की रात लगभग 10 से 11 बजे के बीच यह हत्याकांड उस समय घटित हुआ जब आरोपी स्वामिदीन और रामकरण अपने कुछ साथियों के साथ खरवाही मंदिर के पास पहुंचे थे। वहां पहले से मौजूद डिंपल सिंह के साथ उनका विवाद हो गया, जो कि पूर्व का चला आ रहा विवाद बताया गया। बात इतनी बढ़ गई कि आरोपियों ने डिंपल सिंह को जबरन पकड़कर अपनी गाड़ी में बैठा लिया और रास्ते में मारपीट शुरू कर दी।
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डिंपल की चीख-पुकार सुनकर मौके पर मौजूद भानु प्रताप सिंह और लक्ष्मण सिंह उसकी मदद के लिए दौड़े, लेकिन तब तक आरोपी उसे लेकर वहां से फरार हो चुके थे। कुछ ही घंटों बाद पुलिस को डिंपल सिंह का शव मिला, जिससे गांव में सनसनी फैल गई।
जांच में जुटाए गए ठोस साक्ष्य, कोर्ट में पेश हुआ अभियोग पत्र
हत्या के बाद पुलिस ने गंभीरता से जांच शुरू की। घटनास्थल से लेकर मृतक के शरीर पर मिले घावों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान सहित अन्य तकनीकी साक्ष्यों को आधार बनाकर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मजबूत केस तैयार किया। पूरा मामला अभियोजन की ओर से शासकीय अधिवक्ता पंकज कुमार पटेल ने अदालत में प्रस्तुत किया।
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अदालत में सुनवाई के दौरान शासकीय अधिवक्ता ने साक्ष्यों के आधार पर यह सिद्ध कर दिया कि हत्या सुनियोजित थी और आरोपियों ने मिलकर घटना को अंजाम दिया। अदालत ने अभियोजन के पक्ष को मजबूत मानते हुए दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया और उम्रकैद की सजा सुनाई। इस फैसले के बाद डिंपल सिंह के परिजनों ने संतोष व्यक्त किया है कि वर्षों की लड़ाई के बाद उन्हें न्याय मिला।