मध्य प्रदेश सरकार ने पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज (संशोधन) अध्यादेश 2021 को मंजूरी दे दी है। इसकी अधिसूचना रविवार रात को जारी हुई। इसके अनुसार जहां एक साल से चुनाव नहीं हुए हैं, ऐसी पंचायतों के परिसीमन को निरस्त कर दिया गया है। इन जिला, जनपद और ग्राम पंचायतों में अब पुरानी ही व्यवस्था रहेगी। यानी आरक्षण व्यवस्था में फिलहाल कोई बदलाव नहीं होगा। जो जैसा था, वैसा ही रहेगा।
राज्यपाल मंगूभाई सी. पटेल के हस्ताक्षर से जारी अध्यादेश में 18 नवंबर की तारीख डली है। इसे ही 21 नवंबर को प्रकाशित किया गया है। कमलनाथ सरकार ने सितंबर 2019 में प्रदेश में जिले से ग्राम पंचायतों तक नया परिसीमन लागू किया था। इसके बाद करीब 1,200 नई पंचायतें बनी थीं। 102 ग्राम पंचायतों को समाप्त कर दिया था। इसके साथ ही 1,950 की सीमा में बदलाव किए गए थे। अधिकारियों के मुताबिक पंचायतों में चुनाव से पहले परिसीमन कराने का प्रावधान है। परिसीमन होने के बाद एक साल के अंदर चुनाव नहीं हुए, तो परिसीमन निरस्त हो जाएगा। इसके बाद वहां परिसीमन के पहले की व्यवस्था लागू रहेगी।
कांग्रेस को अध्यादेश पर आपत्ति
कांग्रेस प्रवक्ता सैयद जाफर ने कहा कि इस अध्यादेश से लग रहा है कि मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार ने पंचायत चुनाव को आगे बढ़ा दिया है। क्या मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार ने पूर्व में ग्राम पंचायतों के लिए किए गए परिसीमन को निरस्त किया है? क्या भाजपा सरकार पंचायत चुनाव से डर रही है?
मध्य प्रदेश में पंचायतों की संख्या
पता हो मध्य प्रदेश में 23,912 ग्राम पंचायतें हैं। 904 जिला पंचायत सदस्य और 6035 जनपद सदस्य त्रि-स्तरीय पंचायत का प्रतिनिधित्व करते हैं। 2014-15 में हुए पंचायत चुनाव के बाद 2020 तक उनका कार्यकाल खत्म हो चुका है। 2014-15 में पंचायत चुनाव हुए थे। इससे 2020 तक उनका कार्यकाल समाप्त हो चुका है। परिसीमन से पहले प्रदेश में 22 हजार 812 पंचायतें थीं।