खंडवा जिले में माखनलाल चतुर्वेदी गर्ल्स कॉलेज के एग्जाम पेपर में विवादित सवाल पूछने पर हंगामा हो गया। कॉलेज में फर्स्ट ईयर की स्टूडेंट्स से पर्सनालिटी डेवलपमेंट सब्जेक्ट का टेस्ट लिया गया। इस टेस्ट में स्टूडेंट्स से आपत्तिजनक सवाल पूछे गए। इन सवालों में पूछा गया कि क्या मुझे कभी-कभी यह चिंता हो जाती है कि कहीं मैं नपुसंक न हो जाऊं या विपरित लिंग के व्यक्ति से मिलने पर मुझे कुछ घबराहट सी मालूम होती है।
बता दें कि सिलेबस से हटकर सेक्स लाइफ से जुड़े सवाल के जवाब हां और ना में देने थे। टेस्ट के बाद स्टूडेंट्स ने कॉलेज प्रिंसिपल से इस तरह के सवाल पूछे जाने की शिकायत की। हालांकि, कॉलेज प्राचार्य का कहना है, मनोविज्ञान में इन प्रश्नों का जिक्र है। लेकिन मामला बढ़ता देख कॉलेज प्राचार्य तुरंत टेस्ट रद्द करने के आदेश दे दिए।
पेपर में इस तरह के सवाल पूछे गए, जिन पर छात्राओं ने ली आपत्ति...
- मुझे कभी-कभी यह चिंता हो जाती है कि कहीं मैं नपुसंक न हो जाऊं
- विपरित लिंग के व्यक्ति से मिलने पर मुझे कुछ घबराहट सी मालूम होती है
- बुढ़ापे से शारीरिक शक्ति के क्षीण होने की संभावना मुझे सताया करती है
- कभी-कभी मैं यह सोचकर परेशान हो जाता हूं कि क्रोध में मैं किसी की हत्या न कर दूं या भारी नुकसान न पहुंचा दूं
इन सवालों के पूछे जाने पर छात्राओं का कहना है, व्यक्तित्व विकास के विषय में साइकॉलोजी की एक बुक से सवाल लिए गए, जो कि सिलेबस के हटकर तो है साथ में क्लिनिकल है। यानी कि यह एक क्लिनिकल टेस्ट के प्रश्न होते हैं, जो मरीजों से पूछे जाते हैं। इन प्रश्नों में इतने आपत्तिजनक और अश्लील सवाल हैं, जिनके जवाब देने में भी शर्म आ रही है। यह छात्राओं की गरिमा के खिलाफ है। छात्राओं ने कहा, पूरा टेस्ट सिलेबस से अलग है। फर्स्ट ईयर की कई छात्राओं की उम्र 18 साल से भी कम है। छात्राओं ने आरोप लगाया कि कॉलेज में व्यक्तित्व विकास का विषय अयोग्य और असक्षम प्रोफेसर्स से पढ़वाया जा रहा है, जो कि अनुचित है। इसके बाद कॉलेज प्रबंधन से इस प्रश्न-पत्र को रद्द करने के आदेश जारी कर दिए।
साइकॉलोजिकल सेंटर वाराणसी से प्रकाशित...
जिस पुस्तक से गर्ल्स कॉलेज के स्टॉफ ने यह सवाल लिए थे, वह रुपा साइकॉलोजिकल सेंटर वाराणसी से प्रकाशित है। इनमें पब्लिशर्स ने लिखा कि टेस्ट बुक में 10 क्षेत्रों, जैसे स्वास्थ्य, उपस्थिति और चोट, महत्वाकांक्षा का क्षेत्र, पारिवारिक चिंताएं, दोस्ती और प्रेम संबंधी चिंताएं, सामाजिक संबंध और अनुमोदन, भविष्य की चिंताएं, सभ्यता की चिंताएं, युद्ध, सदाचार, अपराध और शर्म, शारीरिक और शारीरिक अभिव्यक्तियां और मनोवैज्ञानिक अभिव्यक्तियां शामिल हैं। टेस्ट बुक में लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग प्रतिशत मानदंड उपलब्ध हैं। 19 से 24 साल आयु समूह का होना अनिवार्य है। छात्राओं ने शिकायत में इस बात का जिक्र भी किया, टेस्ट पेपर के लिए उन्हें रुपा साइकोलॉजिकल सेंटर की बुक के आठ पृष्ठ थमा दिए गए और कहा गया कि इन आठ पन्नों की फोटोकॉपी उन्हें खुद ही करानी पड़ेगी। फर्स्ट ईयर की 500 से ज्यादा छात्राओं ने अपने खर्च से टेस्ट पेपर के लिए फोटो कॉपी कराई।
कॉलेज प्राचार्य का क्या कहना है....
कॉलेज प्राचार्य डॉ. एके जैन का बताया, नई शिक्षा नीति के अंतर्गत व्यक्तित्व विकास विषय पाठ्यक्रम में शामिल है, जिसे किसी भी संकाय का स्टूडेंट्स वोकेशनल कोर्स के रूप में सेलेक्ट कर सकता है। आंतरिक मूल्यांकन के लिए प्रश्न-पत्र को साइकोलॉजी विभाग ने तैयार किया है। जो प्रश्न पूछे गए हैं, वह विषय आधारित हैं। प्राचार्य डॉ. एके जैन का कहा कि मेरी टेबल पर एक शिकायती आवेदन मिला है, जिसमें कुछ छात्राओं ने प्रश्न-पत्र पर आपत्ति जाहिर की। इसलिए मैंने तत्काल उस प्रश्न पत्र को रद्द करने के निर्देश दिए।