मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बच्चों को स्वर्ण प्राशन चटाते हुए।
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मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रदेश में बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए कई अभियान संचालित हो रहे हैं। मेरा समाज से आह्वान है कि सुपोषण युक्त समाज के निर्माण में अपना महत्वपूर्ण योगदान दें। बच्चों को कुपोषण से बचाने में स्वर्ण प्राशन का भी अति महत्व है। यह 16 संस्कारों में से एक है, जो वैज्ञानिक आधार पर बने हैं।
मुख्यमंत्री ने तुलसी नगर स्थित आरोग्य भारती कार्यालय में सुपोषण अभियान कार्यक्रम में बच्चों के लिए इम्युनिटी बूस्टर माने गए स्वर्ण प्राशन का प्रदाय किया। उन्होंने कहा कि ऋषि-मुनियों, मनीषियों ने हमेशा यह चिंता की है कि मनुष्य को सुखी रहना है तो निरोग रहना जरूरी है। कोशिश यह ही है कि हम बीमार ना हों। बचपन में हमारे गांव में भी शहद चटाया जाता था। जो संपन्न थे, वह सोने के चम्मच से चटाते थे। कोई उंगली से चटाता था। जन्म घुट्टी भी चटाई जाती थी। अब यह बंद हो गया है। जन्म से 16 साल की आयु तक अभिभावक बच्चों में इसका उपयोग करते हैं। बच्चे कुपोषित ना हों, स्वस्थ हों, रोग प्रतिरोधक क्षमता उनमें विकसित हो, इसकी कल्पना आज से हजारों साल पहले भारत ने की थी। इस अवसर पर आरोग्य भारती के डॉ. अशोक कुमार बाजपेयी, मप्र के आयुष मंत्री रामकिशोर कांवरे, भोपाल महानगर के अध्यक्ष डॉ. अभिजीत देशमुख भी मौजूद थे।